यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में छोटी लड़कियों के साथ हो रहे गलत व्यवहार पर अपनी नाराजगी जताई है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को एक प्रस्ताव पास किया गया जिसमें लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और कम उम्र में शादी की कड़ी निंदा की गई। संसद ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह इन लड़कियों की सुरक्षा के लिए अपने कानूनों और न्यायिक ढांचे में सुधार करे।

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यूरोपीय संसद के सदस्यों ने कहा है कि यूरोपीय संघ को इन अपराधों के खिलाफ और सख्त रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से मांग की है कि अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के शिकार परिवारों की शिकायतों को सुनने के लिए एक नेशनल सिस्टम बनाया जाए। संसद ने जोर दिया कि ऐसे मामलों की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

प्रस्ताव में यह बात साफ कही गई कि जबरन धर्म परिवर्तन और शादी को केवल पारिवारिक या धार्मिक विवाद नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाए। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि अगवा की गई लड़कियों को सुरक्षित वापस लौटने का मौका मिलना चाहिए।

UN के एक्सपर्ट्स ने भी इस मामले में गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अक्सर पुलिस इन शिकायतों को नजरअंदाज कर देती है और लड़कियों की सही उम्र की जांच नहीं की जाती। UN ने मांग की है कि शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल की जाए और जबरन धर्म परिवर्तन को एक अलग अपराध मानकर उसे कानूनन जुर्म बनाया जाए।

Alliance Defending Freedom जैसे ग्रुप्स ने भी इन घटनाओं के खतरनाक पैटर्न पर ध्यान दिलाया है। 2025 के UN आंकड़ों के मुताबिक, जबरन शादी और धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली महिलाओं और लड़कियों में 75% हिंदू और 25% ईसाई थीं। इनमें से करीब 80% मामले सिंध प्रांत के थे और 14 से 18 साल की लड़कियां सबसे ज्यादा खतरे में थीं।

इस प्रस्ताव में 13 साल की ईसाई लड़की Maria Shahbaz का जिक्र भी किया गया है। मार्च 2026 में उसका अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन और शादी कराई गई थी, जिसका मामला अभी पाकिस्तानी अदालत में लंबित है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.