ब्रुसेल्स में 18 और 19 जून को यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं की एक बड़ी बैठक हुई। इस मीटिंग में उन्होंने Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा पर खास चर्चा की। नेताओं ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए ताकि समुद्री रास्ते सबके लिए खुले रहें और किसी को परेशानी न हो।

समुद्री सुरक्षा और देशों की भूमिका

यूरोपीय काउंसिल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (MoU) का स्वागत किया है। नेताओं ने कहा कि यह समझौता इलाके में शांति लाने और Strait of Hormuz से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक अच्छा मौका है। इस दौरान पाकिस्तान और कतर जैसे देशों द्वारा शांति कराने के लिए की गई कोशिशों की भी तारीफ की गई।

ईरान पर सख्त रुख

ईरान के मुद्दे पर यूरोपीय संघ ने अपनी बात दोहराई कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने के खिलाफ है। उन्होंने तेहरान से मांग की कि वह परमाणु नियमों का पूरी तरह पालन करे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ फिर से सहयोग शुरू करे। साथ ही, यूरोपीय संघ ने ईरान सरकार से अपने नागरिकों पर हो रही हिंसा और दमन को रोकने और मानवाधिकारों का सम्मान करने को कहा है।

गाजा और वेस्ट बैंक के हालात

गाजा और वेस्ट बैंक में मानवीय स्थिति बिगड़ने पर यूरोपीय नेताओं ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने इसराइल से कहा कि वह मानवीय मदद के लिए बॉर्डर क्रॉसिंग को तुरंत खोले ताकि राहत सामग्री बिना किसी रुकावट के लोगों तक पहुंच सके।

  • दो-राष्ट्र समाधान: यूरोपीय संघ ने इसराइल और फिलिस्तीन के दो अलग और लोकतांत्रिक देशों के रूप में शांति से रहने का समर्थन किया।
  • गाजा में नियंत्रण: उन्होंने साफ किया कि गाजा पट्टी के किसी भी हिस्से पर इसराइल का स्थायी नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
  • वेस्ट बैंक: वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ हिंसा की निंदा की गई और इसराइल से इसे रोकने को कहा गया।

लेबनान और हिजबुल्लाह पर बयान

लेबनान में ceasefire (युद्धविराम) के उल्लंघन पर भी चिंता जताई गई। यूरोपीय संघ ने इसराइल पर हिजबुल्लाह के हमलों की निंदा की और इस समूह के पूरी तरह निशस्त्रीकरण की मांग की। साथ ही, इसराइल से अपील की गई कि वह लेबनान की सीमा और संप्रभुता का सम्मान करे और वहां से अपनी सेना हटा ले।

यूरोपीय नेताओं ने लेबनान की सेना और वहां की सरकारी संस्थाओं को अपना समर्थन जारी रखने की बात कही ताकि लेबनान सरकार अपने पूरे इलाके में अपना नियंत्रण कायम कर सके।