फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाकर दुबई भागने वाले अपराधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों ने बड़ा एक्शन लिया है. हाल ही में राजस्थान पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश किया है. इस खेल में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लेकर खाड़ी देशों का रुख कर रहे थे.

राजस्थान और हरियाणा के अपराधियों पर पुलिस और CBI का कड़ा एक्शन

राजस्थान के सादुलपुर में पुलिस ने एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. यहां एक हिस्ट्रीशीटर ने फतेहपुर के ई-मित्र संचालक की मदद से फर्जी आधार कार्ड बनवाया और विजयपाल सिंह के नाम से नया पासपोर्ट हासिल कर लिया. जांच में पता चला कि यह आरोपी 16 अक्टूबर 2024 को दिल्ली से दुबई गया था और 10 नवंबर 2024 को वापस आया था. पुलिस ने आरोपी को दो दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है.

वहीं दूसरी तरफ, सीबीआई ने हरियाणा पुलिस के वांछित अपराधी आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह को दुबई से भारत वापस लाने में सफलता पाई है. आलोक कुमार अपराधियों को फर्जी पते पर पासपोर्ट दिलाने वाले गिरोह का सरगना था. यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे पकड़ा और भारत डिपोर्ट किया.

दुबई और सिंगापुर के नाम पर नोएडा में 5 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी

केवल फर्जी पासपोर्ट ही नहीं, बल्कि विदेश यात्रा के नाम पर ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं. नोएडा में रेंजर्स क्लब नाम की एक फर्जी ट्रैवल एजेंसी ने करीब 100 लोगों से दुबई और सिंगापुर के टूर पैकेज के नाम पर 5 करोड़ रुपये ठग लिए. आरोपी इमरान, अभय और शैलेंद्र खुद को प्रतिष्ठित फर्म का प्रतिनिधि बताते थे और फर्जी दस्तावेज दिखाकर तुरंत पैसे वसूल लेते थे. पुलिस अब इनके बैंक खातों की जांच कर रही है.

दुबई एयरपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों की सख्त निगरानी

फर्जी पासपोर्ट के मामलों को रोकने के लिए हवाई अड्डों पर सख्ती बढ़ा दी गई है. लखनऊ हवाई अड्डे पर दुबई से लौटे मोहम्मद इजहार को फर्जी पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसने अपनी जन्मतिथि बदलकर नया पासपोर्ट बनवाया था. दुबई के जनरल डायरेक्टरेट ऑफ रेजिडेंसी एंड फॉरेनर्स अफेयर्स (GDRFA) के अनुसार, उनकी वीजा प्रणाली पूरी तरह से ऑटोमैटिक है और आवेदकों के पुराने इतिहास की जांच करने में पूरी तरह सक्षम है, जिससे फर्जी दस्तावेजों को आसानी से पकड़ लिया जाता है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

फर्जी पासपोर्ट के मामले में पकड़े जाने पर किस कानून के तहत कार्रवाई होती है?

ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट अधिनियम 1967 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है और सख्त कार्रवाई की जाती है.

विदेश में छिपे अपराधियों को वापस भारत लाने की क्या प्रक्रिया है?

स्थानीय पुलिस और सीबीआई जैसी एजेंसियां इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाती हैं. इसके बाद संबंधित देश की सुरक्षा एजेंसियां आरोपी को गिरफ्तार कर भारत डिपोर्ट करती हैं.