संयुक्त राष्ट्र की संस्था FAO ने दुनिया को आगाह किया है कि अगर मौजूदा युद्ध 40 दिनों से ज़्यादा खिंचता है, तो इसका असर सीधे आपकी जेब पर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के बचे हुए महीनों और अगले पूरे साल तक खाने-पीने की चीज़ों के दाम आसमान छू सकते हैं। ऊर्जा और खाद की बढ़ती कीमतों ने पहले ही बाज़ार में हलचल पैदा कर दी है।

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महँगाई बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने बताया कि मार्च 2026 में ही वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक में 2.4% की बढ़ोतरी देखी गई है। अगर जंग लंबी चलती है, तो किसान खाद का कम इस्तेमाल करेंगे या खेती का रकबा घटा सकते हैं, जिससे पैदावार कम होगी। साथ ही, तेल की कीमतों में हर 1% की बढ़त खाने के दाम 0.2% तक बढ़ा देती है।

प्रमुख कारक असर और आंकड़े
खाद्य मूल्य सूचकांक वृद्धि 2.4% (मार्च 2026)
शिपिंग लागत में वृद्धि 18% तक बढ़त
अतिरिक्त भुखमरी का खतरा 4.5 करोड़ नए लोग
खाद व्यापार मार्ग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (30% व्यापार)

प्रवासियों और आम जनता पर इसका क्या असर होगा?

खाद्य तेल, अनाज और खाद की सप्लाई चैन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से आयातित सामान महँगा हो जाता है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होने वाला खाद का व्यापार भी खतरे में है, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और अंत में बाज़ार में फल-सब्जियां और अनाज महँगे हो जाएंगे।

  • विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार शिपिंग और ईंधन की बढ़ती लागत मानवीय सहायता को भी मुश्किल बना रही है।
  • तेल के दामों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट और खेती के खर्च को बढ़ा रहा है।
  • आने वाले महीनों में सप्लाई कम होने से दालों और अनाज के भाव बढ़ सकते हैं।
Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com