घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन आज के समय में इसे पूरा करने के लिए होम लोन की मदद लेना आम बात हो गई है। निजी बैंक कई तरह के होम लोन ऑफर करते हैं ताकि आप घर खरीदने, बनाने या पुराने घर को सुधारने का काम कर सकें। अगर आप क्रेडिट स्कोर, ब्याज दर, EMI (मासिक किस्त) और जरूरी दस्तावेजों को सही से समझ लें, तो यह प्रक्रिया आपके लिए आसान और सस्ती हो सकती है।

क्रेडिट स्कोर क्यों जरूरी है?

होम लोन पर जो ब्याज दर लगती है, वह काफी हद तक आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करती है। अगर आप समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड का भुगतान करते हैं तो आपका स्कोर अच्छा रहता है। अगर आपका स्कोर 800+ (Super Prime Borrower) है, तो आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।

EMI क्या होता है?

EMI (Equated Monthly Installment) वह फिक्स रकम होती है जो आपको हर महीने बैंक को देनी होती है। इस रकम में लोन का मुख्य पैसा (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों शामिल होते हैं। EMI तय करती है कि आप कितने समय में अपना लोन चुका पाएंगे।

444 दिन के लिए FD में मिल रहा हैं बड़ा ब्याज. RBI के रेपो रेट में बदलाव से पहले कर लीजिए सारे बैंक का लिस्ट चेक.

मई 2025 में निजी बैंकों की होम लोन ब्याज दरें

नीचे एक तुलना दी गई है जिसमें बताया गया है कि कौन-सा बैंक कितने ब्याज पर लोन दे रहा है और उस पर कितना EMI बनेगा। यह EMI ₹30 लाख के लोन पर 20 साल की अवधि के लिए है।

बैंक का नाम ब्याज दर (%) मासिक EMI (₹)
J&K बैंक 8.00 25,080
IDBI बैंक 8.25 25,560
करूर वैश्य बैंक 8.45 25,950
HDFC बैंक 8.50 26,040
तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक 8.50 26,040
कोटक महिंद्रा बैंक 8.65 26,310
साउथ इंडियन बैंक 8.70 26,430
एक्सिस बैंक 8.75 26,520
ICICI बैंक 8.75 26,520
कर्नाटका बैंक 8.78 26,580

घर खरीदने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज चेक करने चाहिए?

घर खरीदने से पहले ये दस्तावेज जरूर चेक करें, ताकि भविष्य में कोई कानूनी परेशानी न हो:

  • सेल डीड (Sale Deed)

  • टाइटल डीड (Title Deed)

  • बिल्डिंग प्लान की मंजूरी (Approved Building Plan)

  • कंप्लीशन सर्टिफिकेट (नए घर के लिए)

  • कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए)

  • कन्वर्ज़न सर्टिफिकेट (अगर जमीन कृषि से आवासीय में बदली गई हो)

  • खाता सर्टिफिकेट (खासतौर पर बेंगलुरु में)

  • इन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate)

  • लेटेस्ट टैक्स रसीदें

  • ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट

 

आपकी सैलरी से कैसे तय होता है लोन अमाउंट?

SBI के अनुसार, आपकी सैलरी के आधार पर बैंक यह तय करता है कि आपको कितना लोन दिया जा सकता है। इसे EMI/NMI रेशियो कहते हैं, जहां:

  • EMI = मासिक किस्त

  • NMI = आपकी टैक्स कटने के बाद की नेट सैलरी

EMI आपकी सैलरी का 20% से 70% तक हो सकता है, जो आपकी सालाना इनकम पर निर्भर करता है। आप अगर चाहें तो को-एप्लिकेंट (जैसे पति/पत्नी) को जोड़कर लोन अमाउंट बढ़ा सकते हैं।