फ़्रांस का सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोत Charles de Gaulle अब अरब सागर पहुँच गया है. यह बड़ा कदम Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है. फ़्रांस की रक्षा मंत्री Alice Rufo ने 15 मई को इसकी आधिकारिक जानकारी दी और बताया कि यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक है.

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फ़्रांस का यह मिशन क्यों शुरू किया गया?

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है. सरकार के मुताबिक, यह कदम व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता साफ़ करने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाया गया है. इसके बारे में कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • यह एक रक्षात्मक पहल है और इसका मकसद किसी पर हमला करना नहीं है.
  • इसका लक्ष्य Strait of Hormuz में नेविगेशन की आज़ादी को बहाल करना है.
  • रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के लगभग 40 से 51 देश इस बहुराष्ट्रीय पहल में शामिल हुए हैं.
  • सैन्य अभियान खत्म होने के बाद, इस टीम द्वारा समुद्र से बारूदी सुरंगें हटाने का काम भी किया जा सकता है.

पोत कहाँ से आया और कौन-कौन से देश साथ हैं?

Charles de Gaulle विमानवाहक पोत अपने साथ कई अन्य सहायक जहाजों और फ्रिगेट्स को लेकर चला है. इस यात्रा की समयसीमा इस प्रकार रही:

  • 6 मई 2026: इस पोत ने स्वेज नहर को पार किया.
  • जिबूती स्टॉपओवर: स्वेज नहर के बाद यह पोत कुछ दिनों के लिए जिबूती में रुका, जहाँ फ़्रांस का सैन्य बेस है.
  • 15 मई 2026: पोत आधिकारिक तौर पर अरब सागर में अपनी तय जगह पर पहुँच गया.

इस मिशन में ब्रिटेन भी फ़्रांस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है. ब्रिटेन ने 9 मई 2026 को अपना Type 45 डिस्ट्रॉयर HMS Dragon मध्य पूर्व के लिए तैनात किया था.

ईरान ने इस तैनाती पर क्या प्रतिक्रिया दी?

अरब सागर में इस सैन्य हलचल से ईरान काफी नाराज़ है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर फ़्रांस और ब्रिटेन की नौसेना अमेरिकी सेना के साथ मिलकर इस जलमार्ग में मौजूदगी बढ़ाती है, तो इसे तनाव बढ़ाने वाला कदम माना जाएगा. ईरान ने साफ़ कहा है कि ऐसी स्थिति में वह सैन्य जवाब देगा.

Frequently Asked Questions (FAQs)

Charles de Gaulle पोत अभी कहाँ तैनात है?

यह पोत फिलहाल अरब सागर (Arabian Sea) में तैनात है. रक्षा मंत्री Alice Rufo ने साफ़ किया है कि यह अभी सीधे Strait of Hormuz के अंदर नहीं गया है.

इस मिशन में कुल कितने देश शामिल हैं?

फ़्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में चल रहे इस मिशन में लगभग 40 से 51 देशों ने हिस्सा लेने की सहमति जताई है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.