फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने ऐलान किया है कि उनका बड़ा विमानवाहक पोत Charles de Gaulle अब फ्रांस वापस लौटेगा। यह फैसला हॉर्मुज़ क्षेत्र में हाल ही में हुए सकारात्मक बदलावों के बाद लिया गया है। राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते से इलाके में स्थिरता आने की उम्मीद है।
3 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति Macron ने आधिकारिक तौर पर इस वापसी की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए Memorandum of Understanding (MoU) की वजह से हालात सुधरे हैं, जिसे उन्होंने शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
इसी समय फ्रांसीसी सेना ने जानकारी दी कि Charles de Gaulle का ग्रुप इटली और नीदरलैंड के युद्धपोतों के साथ दक्षिणी लाल सागर की तरफ जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा के लिए किए जा रहे मिशन का हिस्सा है।
इसके अलावा फ्रांस ने मिडिल ईस्ट में माइनहंटर्स, दो फ्रिगेट और एक गश्ती विमान भी तैनात किया है। इन सैन्य संसाधनों को इसलिए भेजा गया है ताकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों का आना-जाना पूरी तरह से फिर से शुरू हो सके और व्यापार में कोई रुकावट न आए।
