फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने परमाणु संचालित विमान वाहक पोत Charles de Gaulle को वापस फ्रांस बुलाने का फैसला किया है। यह निर्णय होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षा हालातों में आए सकारात्मक सुधार के बाद लिया गया है। इस महत्वपूर्ण कदम से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सैद से चर्चा की थी।

🗞️: Iran News: अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध के बाद बदली हकीकत, ईरान के स्पीकर ने वॉशिंगटन को स्वीकार करने को कहा

टूलॉन बंदरगाह पर वापस लौटेगा युद्धपोत

यह युद्धपोत फ्रांस के टूलॉन (Toulon) बंदरगाह पर वापस लौटेगा। राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए फ्रांस अपनी सेना और संसाधनों की तैनाती में बदलाव करना जारी रखेगा। होर्मुज क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच हमलों के थमने को भी इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

मई 2026 में हुई थी तैनाती

यह युद्धपोत मई 2026 के आसपास लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में तैनात किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना था। यह फ़्रांस और ब्रिटेन की एक संयुक्त पहल का हिस्सा था ताकि समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखा जा सके। इस मिशन के दौरान फ़्रांस ने साफ किया था कि वह ईरान के खिलाफ किसी सीधे सैन्य अभियान में शामिल नहीं था।

सुरक्षा के अन्य संसाधन भी हुए थे तैनात

इस सुरक्षा मिशन के तहत फ्रांस ने नौसेना के अन्य संसाधन भी तैनात किए थे, जिनमें समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने वाले दो विशेष जहाज भी शामिल थे। अब परिस्थितियों में आए सुधार के बाद इस युद्धपोत को वापस स्वदेश बुलाने का निर्णय लिया गया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.