फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर Charles de Gaulle को लाल सागर की ओर भेज दिया है। यह युद्धपोत स्वेज नहर से गुजरते हुए दक्षिण की ओर बढ़ रहा है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों के आने-जाने का रास्ता सुरक्षित किया जा सके। यह तैनाती उस समय हुई है जब अमेरिका और इजराइल का ईरान के साथ युद्ध चल रहा है।
फ्रांस ने क्यों भेजा अपना युद्धपोत और इसका मकसद क्या है?
फ्रांस के रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने पुष्टि की है कि यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक है और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर 6 मई 2026 को स्वेज नहर से गुजरा। फ्रांस का कहना है कि वह इस कदम से दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह तैयार और सक्षम है।
- मिशन का स्वरूप: यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक है और अमेरिकी-इजराइली सैन्य अभियानों से अलग है।
- गठबंधन की शर्त: फ्रेंच सैन्य प्रवक्ता Col. Guillaume Vernet ने बताया कि 40 से ज्यादा देशों का ‘होर्मुज गठबंधन’ तभी काम शुरू करेगा जब जहाजों के लिए खतरा कम होगा और समुद्री उद्योग का भरोसा लौटेगा।
- पड़ोसी देशों की सहमति: किसी भी ऑपरेशन के लिए ईरान सहित पड़ोसी देशों की सहमति जरूरी होगी।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या समझौता हो सकता है?
फ्रांस ने इस संकट को सुलझाने के लिए एक राजनयिक रास्ता प्रस्तावित किया है। फ्रांस का सुझाव है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटा ले और इसके बदले में ईरान परमाणु मुद्दों पर बातचीत शुरू करे और व्यापारिक जहाजों पर हमले बंद करे। 7 मई 2026 को राष्ट्रपति Macron ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से इस बारे में बात की।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ डील संभव है, लेकिन अगर रास्ता नहीं खुला तो और बमबारी की जा सकती है। वहीं ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को केवल एक “विश लिस्ट” बताकर उम्मीदों को कम करने की कोशिश की है।
इस पूरे विवाद का दुनिया और तेल बाजार पर क्या असर है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी सप्लाई रुकावट है। यह विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर दिया।
हाल की घटनाओं में, 6 मई को अमेरिकी सेना ने एक ईरानी तेल टैंकर पर गोली चलाई जो अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। साथ ही, 7 मई को इजराइल ने बेरूत में एक हवाई हमला कर हिजबुल्लाह कमांडर को मार गिराया। इन सब तनावों के बीच फ्रांस की यह कोशिश समुद्री व्यापार को दोबारा शुरू करने की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
फ्रांस का युद्धपोत कहां जा रहा है और क्यों?
फ्रांस का परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर Charles de Gaulle लाल सागर के रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर जा रहा है ताकि वहां जहाजों का रास्ता सुरक्षित किया जा सके।
फ्रांस ने संकट सुलझाने के लिए क्या प्रस्ताव दिया है?
फ्रांस ने प्रस्ताव दिया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाए और ईरान बदले में परमाणु मुद्दों पर बातचीत करे और जहाजों पर हमले बंद करे।