लेबनान पर इसराइल के हमले से भड़का फ्रांस, कहा अमेरिका-ईरान सीजफायर में लेबनान को भी करें शामिल
इसराइल और लेबनान के बीच चल रही लड़ाई में अब फ्रांस भी कूद पड़ा है। फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने लेबनान पर हुए इसराइल के ताजा हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इन भारी हमलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ये अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को कमजोर कर रहे हैं। फ्रांस का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में वाकई शांति चाहिए तो लेबनान को भी सीजफायर समझौते का हिस्सा बनाना होगा।
फ्रांस और अन्य देशों का इस मामले पर क्या कहना है?
फ्रांस के विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि लेबनान को इस युद्ध में बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लेबनान की तबाही से समस्या हल नहीं होगी बल्कि तनाव और बढ़ेगा। फ्रांस के साथ-साथ ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस पर अपनी राय दी है:
- फ्रांस: विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने हमलों को ‘अस्वीकार्य’ बताया और कहा कि ईरान को भी अपनी गतिविधियों पर लगाम लगानी चाहिए।
- ब्रिटेन: विदेश सचिव Yvette Cooper ने कहा कि इसराइल के ये हमले शांति की कोशिशों के लिए बहुत नुकसानदायक हैं।
- संयुक्त राष्ट्र: महासचिव António Guterres ने चेतावनी दी कि इन हमलों से पूरे इलाके में एक बड़ी जंग छिड़ने का खतरा है।
- पाकिस्तान: प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif, जिन्होंने इस समझौते में मध्यस्थता की, उनका भी मानना है कि समझौता लेबनान के लिए भी होना चाहिए।
लेबनान में हुए नुकसान और समझौते की मौजूदा स्थिति
8 और 9 अप्रैल 2026 को लेबनान के मध्य बेरूत और अन्य हिस्सों में भारी बमबारी हुई है। इसराइल का कहना है कि उसने 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। इस टकराव की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्ते का सीजफायर अब खतरे में नजर आ रहा है।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| मृतकों की संख्या | लेबनान में करीब 254 लोगों की मौत की खबर है |
| घायलों की संख्या | 1,100 से ज्यादा लोग हमलों में घायल हुए हैं |
| इसराइल का रुख | Netanyahu ऑफिस ने कहा कि सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है |
| ईरान की धमकी | ईरान ने कहा है कि हमले न रुके तो वह समझौते से पीछे हट सकता है |
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 7 अप्रैल को ईरान के साथ जिस समझौते का ऐलान किया था, उसमें फिलहाल लेबनान का जिक्र नहीं था। इसी वजह से इसराइल अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है। अब सबकी नजरें 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली बातचीत पर टिकी हैं, जहां इस मसले को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।





