समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए फ़्रांस ने एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पश्चिम एशिया में बारूदी सुरंगों को हटाने वाले विशेष सैन्य उपकरण और जहाज तैनात करने का ऐलान किया है। इसका मुख्य मकसद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित बनाना है ताकि व्यापार में कोई रुकावट न आए।

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क्या-क्या भेजा गया है और क्यों

3 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि फ़्रांस ने इस मिशन के लिए दो माइनहंटर्स (सुरंग खोजने वाले जहाज), दो फ्रिगेट युद्धपोत और एक समुद्री गश्ती विमान भेजा है। ये सभी इकाइयां इस इलाके में तैनात रहेंगी ताकि पानी में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाकर जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा सके। इसी के साथ फ़्रांस का विमानवाहक पोत Charles de Gaulle अब अपने होम पोर्ट Toulon वापस लौट रहा है।

ओमान और अन्य देशों की भूमिका

इस पूरे मिशन के लिए फ़्रांस और ब्रिटेन ने ओमान के साथ मिलकर काम करने का वादा किया है। राष्ट्रपति मैक्रों ने यह फैसला ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद के साथ बातचीत के बाद लिया। ओमान अपनी Didamar द्वीप स्थित हॉर्मुज़ कंट्रोल स्टेशन से जहाजों के ट्रैफिक को संभालने के लिए तैयार है। अगर ज़रूरत पड़ी तो ब्रिटेन और फ़्रांस एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मिशन को भी तैयार रखने की बात कह रहे हैं, जिसमें दुनिया के 15 से 40 देश शामिल हो सकते हैं। बेल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी और इटली जैसे देश भी अपनी मदद देने के लिए तैयार हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया और नियम

यह तैनाती 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MOU) के बाद की गई है। राष्ट्रपति मैक्रों ने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम बताया। हालांकि, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री ने 30 जून 2026 को साफ़ कहा कि समझौते के मुताबिक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरंग हटाने का काम सिर्फ ईरान करेगा और फ़्रांस को किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

मिशन का मकसद

कोअलिशन के प्रवक्ता ने साफ़ किया है कि यह मिशन पूरी तरह से बचाव के लिए है। इसका काम केवल सुरंगों को साफ़ करना और सुरक्षित रास्ता देना है। इस मिशन का मकसद किसी देश पर हमला करना या क्षेत्रीय विवादों में पक्ष लेना नहीं है। यह तैनाती तभी तक रहेगी जब तक इस इलाके में हिंसा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।

  • मार्च 2026: राष्ट्रपति मैक्रों ने पहली बार टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव रखा था।
  • अप्रैल 2026: ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर और मैक्रों ने सहयोगियों के साथ प्लानिंग की।
  • 4 जून 2026: ब्रिटेन और फ़्रांस ने ऑपरेशनल प्लान फाइनल किए।
  • 17 जून 2026: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता साइन हुआ।
  • 3 जुलाई 2026: फ़्रांस ने आधिकारिक तौर पर सैन्य संपत्ति तैनात करने का ऐलान किया।