ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर फ्रांस ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ़ कर दी है। फ्रांस का कहना है कि जब तक यूरोपीय देश इस पर औपचारिक रूप से सहमत नहीं होंगे, तब तक ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना मुमकिन नहीं होगा। इस पूरे मामले में फ्रांस ने सामूहिक फैसले और कड़े नियमों की बात कही है।
फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने 19 जून 2026 को साफ़ तौर पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंधों को हटाने के लिए फ्रांस की सहमति जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि जब तक ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों और क्षेत्रीय व्यवहार में बड़े सुधार नहीं करता, तब तक पेरिस प्रतिबंधों में ढील देने का समर्थन नहीं करेगा। इससे पहले जनवरी 2025 में भी उन्होंने फ्रांसीसी नागरिकों की गिरफ्तारी के मामले में ईरान के अधिकारियों पर नए यूरोपीय संघ प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया था।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने भी 15 जून 2026 को G7 शिखर सम्मेलन से पहले कहा कि यूरोपीय संघ प्रतिबंध तभी हटाएगा जब ईरान के व्यवहार में “वास्तविक बदलाव” नजर आएगा और इसे सही तरीके से प्रमाणित किया जा सकेगा।
ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई एक अंतरिम सहमति के बाद, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली (E4 ब्लॉक) ने 14-15 जून 2026 को यह जानकारी दी कि वे प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस प्रगति दिखानी होगी।
प्रतिबंध हटाने के लिए फ्रांस की शर्तें:
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में फ्रांस के पास वीटो पावर है, इसलिए किसी भी अंतिम समझौते के लिए फ्रांस की मंजूरी अनिवार्य होगी।
- परमाणु मुद्दों के अलावा, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और मध्य पूर्व के सशस्त्र समूहों को दिए जा रहे समर्थन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
- यूरोपीय संघ का मानना है कि प्रतिबंध व्यवहार बदलने के लिए लगाए गए हैं, इसलिए इन्हें हटाने के लिए सबूत जरूरी हैं।
दूसरी तरफ, यूरोपीय संघ ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के कारण ईरान पर लगे प्रतिबंधों को 13 अप्रैल 2027 तक बढ़ा दिया है। इसमें 262 व्यक्तियों और 53 संस्थाओं पर यात्रा प्रतिबंध और उनकी संपत्ति फ्रीज करने जैसे कड़े कदम शामिल हैं।
