फ्रांस की रक्षा मंत्री Catherine Vautrin ने इसराइल और लेबनान के बीच चल रहे तनाव पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इसराइल को लेबनान की जमीन से अपनी सेना हटानी होगी। साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से इस महीने की शुरुआत में हुए युद्ध विराम समझौते का सम्मान करने की अपील की है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
फ्रांस ने इसराइल और लेबनान के लिए क्या शर्तें रखीं?
रक्षा मंत्री Catherine Vautrin ने कहा कि लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि फ्रांस का मुख्य मकसद लेबनान के लोगों और वहां की सरकार को शांति और स्थिरता दिलाने में मदद करना है। उन्होंने यह भी कहा कि Hezbollah का निरस्त्रीकरण लेबनान के लोगों को ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से करना चाहिए।
UNIFIL शांति सैनिकों पर हमले का क्या मामला है?
- 18 अप्रैल 2026 को UNIFIL शांति सैनिकों पर हमला हुआ था जिसे फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का बड़ा उल्लंघन बताया है।
- फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इस हमले के लिए Hezbollah को जिम्मेदार ठहराया और लेबनान सरकार से दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।
- दूसरी तरफ Hezbollah ने इन आरोपों को नकारा है और कहा है कि बिना पूरी जांच के किसी पर दोष नहीं मढ़ना चाहिए।
अमेरिका और ईरान को लेकर फ्रांस की क्या चिंता है?
Catherine Vautrin ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस फैसले की आलोचना की जिसमें उन्होंने बिना किसी तालमेल या साफ मकसद के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने का एकतरफा फैसला लिया। उन्होंने चिंता जताई कि इस तनाव की वजह से लेबनान अब गृहयुद्ध की कगार पर खड़ा है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसराइल और लेबनान के बीच युद्ध विराम की घोषणा की थी और दोनों देशों के नेताओं को बातचीत के लिए व्हाइट हाउस बुलाया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लेबनान में युद्ध विराम कब शुरू हुआ था
अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और लेबनान के बीच युद्ध विराम 17 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था जिसे बाद में मई के मध्य तक बढ़ा दिया गया।
इसराइल का अपनी सेना हटाने पर क्या स्टैंड है
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने युद्ध विराम का स्वागत किया लेकिन दक्षिणी लेबनान से सेना हटाने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें दोबारा हमले का खतरा महसूस हो रहा है।