फ्रांस और पाकिस्तान ने लेबनान में शांति लाने के लिए हाथ मिलाया है। 10 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बात की और कहा कि लेबनान को युद्ध रोकने के समझौते (ceasefire) में शामिल करना बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि अगर लेबनान इस डील का हिस्सा नहीं होगा, तो इलाके में शांति नहीं टिक पाएगी।

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फ्रांस और पाकिस्तान ने क्या चर्चा की?

फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot और पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने लेबनान में हो रहे ceasefire के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई। दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि समझौते का पूरी तरह पालन होना चाहिए। इससे पहले 9 अप्रैल को फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने अमेरिका और ईरान को भी साफ कह दिया था कि शांति लंबे समय तक बनी रहे, इसके लिए लेबनान का शामिल होना जरूरी है।

फ्रांस ने लेबनान और इसराइल को लेकर क्या चेतावनी दी?

फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर लेबनान की सरकार कमजोर हुई, तो Hezbollah की ताकत बढ़ेगी। उन्होंने इसराइल से मांग की कि वह आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करे और दक्षिण लेबनान पर कब्जा न करे। साथ ही, फ्रांस ने Hezbollah से अपने हथियार लेबनान सरकार को सौंपने की बात कही है।

हमलों का असर और अन्य देशों का रुख

  • 8 अप्रैल 2026: इसराइल ने लेबनान पर बड़े हमले किए, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
  • ईरान का बयान: ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के बयान से यह साबित होता है कि लेबनान अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए ceasefire का हिस्सा है।
  • लेबनान की मांग: लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से इस बात पर जोर देने को कहा कि लेबनान को समझौते में रखा जाए ताकि इसराइल के हमले दोबारा न हों।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.