फ्रांस ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता के साथ पूरी तरह खड़ा है। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने 24 जुलाई 2026 को लाल सागर में सऊदी झंडे वाले दो कमर्शियल जहाजों पर हुए हूती हमलों की कड़ी निंदा की। फ्रांस ने हूती गुटों से अपनी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद करने को कहा है और स्पष्ट किया है कि वह ASPIDES रक्षा अभियान के तहत समुद्री सुरक्षा और आवाजाही की आजादी को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर फ्रांस का कड़ा रुख
इस साल की शुरुआत से ही फ्रांस का रुख सऊदी अरब के प्रति काफी सहयोगी रहा है। राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने 23 मार्च 2026 को सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman के साथ फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने सऊदी अरब की ओर बार-बार हो रहे ईरानी हमलों की निंदा की और सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत बनाने में मदद करने का वादा किया।
इसके बाद 26-27 मार्च 2026 को पेरिस के पास आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भी यह मुद्दा उठा। वहां फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने ईरान की आक्रामकता को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता जाहिर की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी 30 जुलाई 2026 को जॉर्डन के खिलाफ जारी ईरानी आक्रामकता की निंदा करते हुए जॉर्डन के प्रति अपना समर्थन जताया है। मध्य पूर्व में बढ़ते इन सुरक्षा खतरों के बीच फ्रांस का यह समर्थन सऊदी अरब के लिए एक बड़ी कूटनीतिक मजबूती माना जा रहा है।
