अमेरिका और फ्रांस के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने जहाजों को बचाने के लिए एक नया प्लान बनाया था, लेकिन फ्रांस ने इसमें शामिल होने से साफ मना कर दिया है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट आई है और दुनिया की नजरें अब इस इलाके पर टिकी हैं।

अमेरिका और फ्रांस के प्लान में क्या अंतर है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 मई 2026 को ऐलान किया कि अमेरिका उन जहाजों की मदद करेगा जो खाड़ी में फंसे हुए हैं। इस काम के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) लगभग 15 हजार सैनिक, 100 से ज्यादा विमान, युद्धपोत और ड्रोन तैनात करेगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी।

दूसरी तरफ, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर एक अलग ‘न्यूट्रल मिशन’ बनाएंगे। उनका मकसद केवल व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देना और उन्हें रास्ता दिखाना है। फ्रांस ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं बनेगा और जहाजों से कोई शुल्क लेना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा।

ईरान और सऊदी अरब का इस पर क्या कहना है?

  • ईरान: ईरानी संसद की सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि अमेरिका का कोई भी हस्तक्षेप युद्धविराम के समझौते का उल्लंघन होगा। ईरान का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की योजनाएं केवल कल्पना हैं और वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।
  • सऊदी अरब: सऊदी सरकार ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत किया था। सऊदी अरब ने जोर दिया है कि 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून के हिसाब से होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी रोक-टोक के सभी के लिए खुला रहना चाहिए।

ताजा हालात और बाजार पर असर

4 मई को डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद सोमवार सुबह तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई। इसी दौरान ब्रिटेन की समुद्री व्यापार एजेंसी ने बताया कि एक तेल टैंकर पर अज्ञात हमला हुआ है, हालांकि जहाज के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। फ्रांस ने मांग की है कि स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए तुरंत बातचीत शुरू की जानी चाहिए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए क्या प्लान है?

डोनाल्ड ट्रंप ने 15 हजार सैनिकों और 100 से ज्यादा विमानों के जरिए फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने का फैसला किया है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बरकरार रहेगी।

फ्रांस ने अमेरिकी प्लान में शामिल होने से क्यों मना किया?

फ्रांस और ब्रिटेन एक तटस्थ (neutral) मिशन बनाना चाहते हैं जो केवल व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करे। फ्रांस किसी भी सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा बनकर विवाद में नहीं पड़ना चाहता।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.