फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने ऐलान किया है कि फ्रांस और उसके सहयोगी देश Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक खास मिशन शुरू करेंगे। यह मिशन पूरी तरह से सुरक्षात्मक होगा और इसका मुख्य उद्देश्य कंटेनर जहाजों और तेल के टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देना है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की स्थिति थोड़ी शांत होते ही इस मिशन को जमीन पर उतारा जाएगा। इस फैसले का बड़ा असर वैश्विक बाजार और खाड़ी देशों में व्यापार करने वाले लोगों पर पड़ने की उम्मीद है।

फ्रांस के इस सुरक्षा मिशन में क्या-क्या शामिल है?

फ्रांस के राष्ट्रपति ने साफ किया है कि यह मिशन केवल जहाजों को सुरक्षा देने और रास्ता साफ करने के लिए है। इस मिशन के तहत फ्रांस अपने कई बड़े जंगी जहाजों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है। सुरक्षा के लिए 8 फ्रिगेट्स, 2 एम्फीबियस हेलिकॉप्टर कैरियर और विमानवाहक जहाज Charles de Gaulle को तैनात किया जा सकता है। यह जानकारी Cyprus में हुई एक सुरक्षा बैठक के दौरान दी गई है। फ्रांस के साथ इस मिशन में ग्रीस, इटली, स्पेन और नीदरलैंड जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं।

आम आदमी और खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?

Strait of Hormuz से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। युद्ध की वजह से फिलहाल यहां से जहाजों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई हैं। अगर फ्रांस और उसके सहयोगियों की मदद से यह रास्ता दोबारा खुलता है, तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम जनता को राहत मिल सकती है। हालांकि, ईरान की ओर से कड़ी चेतावनी दी गई है कि युद्ध के बीच इस रास्ते पर सुरक्षा देना आसान नहीं होगा।

मुख्य जानकारी महत्वपूर्ण तथ्य
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 (Operation Epic Fury)
तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची
मिशन का स्वरूप पूरी तरह रक्षात्मक (Defensive)
प्रमुख सहयोगी फ्रांस, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड और स्पेन
वैश्विक तेल सप्लाई Strait of Hormuz से 20% सप्लाई होती है
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.