फ्रांस और ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों का सुरक्षित निकलना पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है. दोनों देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस रास्ते को सुरक्षित करना होगा. इसके लिए दोनों देश एक बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन भेजने को भी तैयार हैं.

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने 3 जुलाई 2026 को एक संयुक्त बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि यह रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था की एक मुख्य नस है और यहां सुरक्षा सुनिश्चित करना सबकी जिम्मेदारी है. इस मामले में Oman ने भी लंदन और पेरिस के साथ सहयोग करने की सहमति दी है ताकि उसके समुद्री क्षेत्र से जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके.

सुरक्षा के लिए फ्रांस ने अपनी सैन्य तैयारी भी शुरू कर दी है. राष्ट्रपति मैक्रोन ने 4 जुलाई 2026 को बताया कि फ्रांस ने मिडिल ईस्ट में माइन-क्लियरिंग यानी बारूदी सुरंग हटाने वाले दो जहाज, दो फ्रिगेट्स और एक समुद्री गश्ती विमान तैनात कर दिया है. हालांकि, फ्रांस का विमानवाहक पोत Charles de Gaulle वापस अपने पोर्ट पर जा रहा है, लेकिन सुरक्षा बल वहां तैनात रहेंगे.

इस पूरे विवाद में ईरान ने कड़ा विरोध जताया है. ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने 4 जुलाई 2026 को चेतावनी दी कि बाहरी देशों को इस इलाके में अपनी सैन्य ताकत नहीं दिखानी चाहिए. ईरान का कहना है कि इस रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल उन देशों की है जो इसके किनारे बसे हैं.

मैक्रोन ने 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MoU) का भी जिक्र किया, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने में मदद मिली है. इससे पहले मार्च 2026 में कई देशों ने मिलकर व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की थी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने को कहा था.

Sushma Kumari

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