मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। फ्रांस की कंपनी का मालवाहक जहाज ‘CMA CGM Kribi’ हॉर्मुज की जलसंधि (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर गया है। फरवरी के अंत में ईरान के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद यह पहला मौका है जब पश्चिमी यूरोप से जुड़ा कोई जहाज इस संवेदनशील रास्ते से सफलतापूर्वक निकला है। यह जहाज गुरुवार दोपहर को दुबई के पास से रवाना हुआ था और शुक्रवार सुबह तक मस्कट के पास पहुंच गया है।

जहाज ने किस रास्ते का इस्तेमाल किया और क्या सावधानी बरती?

CMA CGM Kribi ने ईरान की समुद्री सीमा के पास से तय किए गए एक विशेष कॉरिडोर का इस्तेमाल किया। यह रास्ता क्युशम (Qeshm) और लारक (Larak) द्वीपों के बीच से होकर गुजरता है, जिसे ईरान ने मंजूरी दे रखी है। जहाज ने अपनी पहचान साफ करने के लिए अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) में बदलाव किया और वहां ‘Owner France’ लिख दिया। यह मार्च की शुरुआत से ही फारस की खाड़ी में खड़ा था और अब जाकर इसे आगे बढ़ने का मौका मिला है।

हॉर्मुज जलसंधि में अभी क्या हालात हैं और इसका क्या असर है?

ईरान ने पिछले कई हफ्तों से इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अपना प्रभावी नियंत्रण बना रखा है। वहां की स्थिति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं:

  • ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका या इसराइल से जुड़े जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं मिलेगी।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान सुरक्षित रास्ते के लिए जहाजों से टोल टैक्स वसूल रहा है, जो 20 लाख डॉलर तक हो सकता है।
  • इस रास्ते के बाधित होने से लगभग 2,000 से 3,000 जहाजों का बैकलाग जमा हो गया है।
  • जापान जैसे देशों ने अब मई से सऊदी अरब और यूएई से तेल लाने के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है।

दुनिया के बड़े देशों का इस मामले पर क्या स्टैंड है?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि इस रास्ते को खोलने के लिए कोई भी सैन्य कार्रवाई करना सही नहीं होगा और केवल बातचीत ही इसका समाधान है। वहीं ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा की है ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके।

देश/नेता मुख्य रुख और बयान
फ्रांस (मैक्रों) सैन्य ऑपरेशन को अव्यावहारिक बताया और कूटनीति की सलाह दी।
ब्रिटेन 40 देशों के साथ मिलकर टोल टैक्स का विरोध किया और प्रतिबंधों पर चर्चा की।
अमेरिका (ट्रंप) सहयोगी देशों से तेल सप्लाई की सुरक्षा के लिए खुद जिम्मेदारी लेने को कहा।
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.