G7 देशों ने Strait of Hormuz को फिर से सुरक्षित रूप से खोलने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन की अगुवाई वाले सुरक्षा मिशन को अपनी मंजूरी दे दी है। इस कदम का मकसद समुद्री रास्ते से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की सुरक्षा करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को फिर से पटरी पर लाना है। यह बड़ा फैसला अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद लिया गया है।

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यह आधिकारिक घोषणा 17 जून 2026 को फ्रांस के Evian में हुई G7 Summit के दौरान की गई। इस मिशन का मुख्य काम व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, शिपिंग कंपनियों और बीमा कंपनियों का भरोसा वापस लाना और समुद्र में बिछाए गए बारूदी सुरंगों (mines) को हटाना है ताकि जहाजों का यातायात पूरी तरह शुरू हो सके।

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने स्पष्ट किया कि यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक और स्वतंत्र होगा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत काम करेगा। उन्होंने Strait of Hormuz में किसी भी तरह के टोल टैक्स का कड़ा विरोध किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने जानकारी दी कि ईरान के साथ हुए समझौते के बाद यह रास्ता पहले से ही आंशिक रूप से खुल गया है और 19 जून तक इसे पूरी तरह खोल दिया जाएगा। हालांकि, RAND Corporation के विशेषज्ञ Scott Savitz और पूर्व अमेरिकी नौसेना रियर एडमिरल Mark Montgomery ने चेतावनी दी है कि समुद्री सुरंगों को हटाना एक तकनीकी रूप से कठिन काम है, जिसमें कुछ हफ्ते से लेकर कई महीने लग सकते हैं।

इस मिशन को वैश्विक स्तर पर बड़ा समर्थन मिल रहा है। फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में कई देश शामिल हैं:

  • प्रमुख सहयोगी देश: Netherlands, Italy, Canada, Germany, Japan और अन्य यूरोपीय राष्ट्र।
  • खास भूमिका: Oman ने जहाजों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा प्रदान) करने के लिए अपनी सहमति दी है।
  • अन्य देश: इस मिशन के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाने के लिए 38 देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई थी, जबकि एक अंतरराष्ट्रीय समिट में 51 देशों ने हिस्सा लिया था।

एक प्रस्तावित समझौते (MOU) के अनुसार, समुद्र से बारूदी सुरंगों को हटाने की जिम्मेदारी ईरान की होगी। अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर सुरंगों को हटाने का काम तेजी से शुरू होता है, तो अगले 30 दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकती है। अगर ईरान इस काम में धीमा रहता है, तो अमेरिका इसमें मदद कर सकता है।