G7 Meeting: जयशंकर ने उठाई Global South की आवाज़, ऊर्जा और अनाज की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान
फ्रांस में हुई G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने हिस्सा लिया। 26 और 27 मार्च 2026 को हुई इस मीटिंग में उन्होंने दुनिया के सामने विकासशील देशों यानी Global South की समस्याओं को मजबूती से रखा। Jaishankar ने साफ तौर पर कहा कि आज के समय में ऊर्जा, खाद और खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया की बड़ी संस्थाओं को अब अपनी सोच बदलने की जरूरत है ताकि गरीब और विकासशील देशों को उनका हक मिल सके।
बैठक में भारत ने किन मुख्य मुद्दों पर बात की?
विदेश मंत्री Jaishankar ने मीटिंग के दौरान बताया कि दुनिया के विकासशील देश ऊर्जा की कमी और बढ़ती कीमतों से सबसे ज्यादा परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सभी देशों को सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा मिलनी चाहिए ताकि उनकी तरक्की न रुके। इसके अलावा, उन्होंने खाद और अनाज की सप्लाई चैन को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया ताकि किसी भी वैश्विक संकट के समय खाने की कमी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय की चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बड़े बदलाव करना अब बहुत जरूरी हो गया है।
Global South के लिए भारत की क्या है मांग?
- विकासशील देशों के लिए सस्ती ऊर्जा और खाद की सप्लाई को आसान बनाना।
- UNSC में सुधार करना ताकि वह आज की दुनिया की सच्चाई को बेहतर तरीके से दिखा सके।
- शांति अभियानों को और अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की जरूरत है।
- मानवीय मदद पहुंचाने वाली सप्लाई चैन को मजबूत बनाना ताकि संकट में फंसे लोगों तक सामान पहुंच सके।
- जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच ग्लोबल इकोनॉमी को स्थिर रखने के लिए देशों के बीच तालमेल बढ़ाना।
द्विपक्षीय मुलाकातों में क्या हुई चर्चा?
G7 मीटिंग के दौरान Jaishankar ने कनाडा की विदेश मंत्री Anita Anand और जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul के साथ अलग से बातचीत की। कनाडा के साथ व्यापार और जरूरी खनिजों के क्षेत्र में रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही पश्चिम एशिया के हालातों और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर इसके असर को लेकर भी बात की गई। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खुला रखना कितना जरूरी है। भारत ने एक बार फिर साफ किया कि वह UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए अपना दावा मजबूती से पेश करता रहेगा।




