पेरिस में G7 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों की बड़ी बैठक शुरू हुई है। इस मीटिंग में ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहे तनाव और संभावित युद्ध पर चर्चा की जा रही है। सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz के बंद होने को लेकर है, जिससे पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
Strait of Hormuz और तेल की किल्लत का क्या खतरा है?
यूरोपीय आर्थिक आयुक्त Valdis Dombrovskis ने इस बात पर जोर दिया है कि Strait of Hormuz को जल्द से जल्द फिर से खोला जाना चाहिए। International Energy Agency (IEA) के चीफ Fatih Birol ने 18 मई 2026 को चेतावनी दी कि ईरान विवाद और इस समुद्री रास्ते के बंद होने की वजह से तेल का कमर्शियल स्टॉक तेजी से घट रहा है। उनके मुताबिक, अब केवल कुछ हफ्तों की सप्लाई ही बची है, जिससे भविष्य में तेल की भारी कमी हो सकती है।
G7 बैठक में किन मुद्दों पर बात होगी और देशों का क्या कहना है?
पेरिस में हो रही इस दो दिवसीय बैठक में मिडिल ईस्ट के तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान पर चर्चा हो रही है। अमेरिका के Treasury Secretary Scott Bessent ने कहा कि वह ईरान पर लगे प्रतिबंधों को और कड़ा करने के लिए G7 देशों से बात करेंगे, ताकि ईरान की सैन्य फंडिंग को रोका जा सके। वहीं, जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने ईरान द्वारा पड़ोसी देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ गंभीर बातचीत करनी चाहिए।
ईरान ने इस तनाव के बीच क्या कदम उठाए हैं?
ईरान ने इस समुद्री रास्ते को मैनेज करने के लिए Persian Gulf Strait Authority नाम की एक नई संस्था बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिसमें जंग खत्म करने और भरोसा बनाने की बात कही गई है। दूसरी तरफ, ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने उत्तरी इराक में अमेरिका और इसराइल से जुड़े समूहों पर हमला किया और अमेरिकी हथियार भी जब्त किए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz के बंद होने से क्या असर पड़ेगा
इससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई बाधित होगी, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा पैदा हो सकता है।
G7 देशों की बैठक में मुख्य चर्चा क्या है
बैठक में मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच युद्ध की स्थिति, तेल की सप्लाई चेन और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा करने पर चर्चा हो रही है।
