फ्रांस के एवियान-लेस-बेंस में हुई G7 समिट में दुनिया के ताकतवर देशों ने ईरान को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. G7 देशों ने साफ कर दिया है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. इस समिट में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक नए समझौते का स्वागत किया गया है, जिसे दुनिया की शांति के लिए एक बड़ा मौका माना जा रहा है.

ℹ️: G7 का बड़ा ऐलान, ईरान को कभी नहीं मिलेगी परमाणु हथियार, अमेरिका के साथ हुई नई डील से खत्म होगी जंग

G7 देशों ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में ईरान के साथ जो डील हुई है, वह ऐतिहासिक है. इस समझौते का मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना और उसकी मिसाइल गतिविधियों पर लगाम लगाना है. G7 देशों ने इस समझौते को लागू करने में पूरा सहयोग करने की बात कही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 16 जून 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुए समझौते के तहत वह परमाणु हथियार नहीं रखेगा. उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश की, तो उस पर भारी मुसीबत आएगी.

समझौते की खास बातें

  • हस्ताक्षर: अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर 15 जून 2026 को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन हुए.
  • औपचारिक बैठक: इस समझौते पर औपचारिक तौर पर 19 जून 2026 को Geneva, Switzerland में हस्ताक्षर होंगे.
  • सीजफायर: इस फ्रेमवर्क समझौते के तहत बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए युद्धविराम (ceasefire) को 60 दिनों के लिए बढ़ाया गया है.

जापान के प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने भी इस समझौते का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि International Atomic Energy Agency (IAEA) के साथ तालमेल बिठाकर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना बहुत जरूरी है.

G7 देशों ने एक और महत्वपूर्ण मांग की है कि Strait of Hormuz को तुरंत और बिना किसी शर्त के फिर से खोला जाए ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके.

इस बड़े कूटनीतिक बदलाव में Pakistan और Qatar जैसे देशों का भी समर्थन रहा है. इसके अलावा, G7 देशों ने लेबनान में युद्धविराम और Hezbollah समूह के निशस्त्रीकरण के प्रयासों का भी समर्थन किया है.