फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने G7 समिट के दौरान एक बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि ईरान, हिजबुल्लाह और इसराइल को अब फिर से लड़ाई शुरू नहीं करनी चाहिए। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती शांति समझौता हुआ है जिससे पूरे क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी है।

G7 समिट और मैक्रों का बयान

फ्रांस के एवियन-लेस-बेंस में 15 से 17 जून 2026 तक G7 समिट का आयोजन किया गया। बुधवार को समापन भाषण के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने साफ कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए लड़ाई को रोकना जरूरी है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती समझौते का समर्थन किया और कहा कि G7 देश इस समझौते को लागू करवाने में मदद करेंगे ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को शांतिपूर्वक फिर से खोला जा सके।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या हुआ समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून 2026 को एक शुरुआती समझौता हुआ। इस समझौते की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
  • समझौता साइन होने के बाद ईरान को तेल निर्यात करने की अनुमति मिलेगी।
  • शर्तें पूरी करने पर ईरान को 300 अरब डॉलर के विकास फंड तक पहुंच मिलेगी।
  • अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक फिर से शुरू करने का फैसला किया है।

इस समझौते के आधिकारिक दस्तखत शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने नियमों का पालन नहीं किया तो फिर से सैन्य कार्रवाई हो सकती है।

ईरान, हिजबुल्लाह और इसराइल का रुख

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने ऐलान किया कि 15 जून से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान पूरी तरह बंद रहेंगे। हिजबुल्लाह ने भी इस समझौते का स्वागत किया और इसे एक व्यापक युद्धविराम बताया है।

दूसरी तरफ, इसराइल का रुख अलग है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया कि इसराइल लेबनान को इस समझौते का हिस्सा नहीं मानता। उन्होंने कहा कि इसराइली सेना गाजा, लेबनान और सीरिया में तब तक रहेगी जब तक जरूरी होगा। वहीं, संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की है।