गाजा के बच्चों के लिए अनोखी पहल, तैरना सीखकर खोए हुए अंगों के दर्द को भुला रहे हैं मासूम.

Nura Basta23 August 20263 min read66 viewsWorld
गाजा के बच्चों के लिए अनोखी पहल, तैरना सीखकर खोए हुए अंगों के दर्द को भुला रहे हैं मासूम.

गाजा में जंग के बीच एक बहुत ही मानवीय और सराहनीय पहल शुरू की गई है, जहाँ युद्ध की विभीषिका में अपने हाथ-पैर गंवा चुके बच्चों को तैराकी सिखाकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। इस अनोखे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से युद्ध के डर और ट्रॉमा को दूर करना है ताकि वे पानी में तैरते समय आज़ादी और सुकून का अहसास कर सकें। इस कार्यक्रम के जरिए मासूम बच्चों को एक सुरक्षित माहौल दिया जा रहा है जिससे वे अपनी जिंदगी को फिर से सामान्य तरीके से जीने की कोशिश कर रहे हैं और उनके अंदर का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट रहा है।

जुलाई 2026 में हुई थी इस खास कार्यक्रम की शुरुआत

यह विशेष अभियान जुलाई 2026 के आखिर में शुरू किया गया था, जिसे गैर-लाभकारी संगठन Heal Palestine और Tantish Swimming Academy मिलकर चला रहे हैं। यह ट्रेनिंग मुख्य रूप से गाजा के खान यूनिस और अल-मावासी जैसे इलाकों में दी जा रही है। अगस्त 2026 के आखिर तक इस तैराकी क्लास में लगभग 90 ऐसे बच्चे हिस्सा ले रहे हैं जिनके अंग कट चुके हैं या जो इस जंग में अनाथ हो चुके हैं। इस पहल की देखरेख इब्राहिम अबू जर्राद कर रहे हैं, जिनका साफ कहना है कि उनका मकसद बच्चों को युद्ध की डरावनी यादों से दूर ले जाकर उनके जीवन में सकारात्मकता भरना है।

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विशेषज्ञ कोच दे रहे हैं तैराकी की ट्रेनिंग

बच्चों को तैरना सिखाने के लिए अनुभवी और पेशेवर लोगों की एक टीम बनाई गई है, जिसमें अमजेद तांतिश, राना तांतिश, नजवा अबू अम्र और नुरेद्दीन कशकश जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी में नुरेद्दीन कशकश खुद भी एक एम्प्यूटी यानी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इस संघर्ष में अपना एक अंग गंवा दिया था, इसलिए वे बच्चों के दर्द को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। इस ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेने वाले बच्चों में 14 साल के महमूद रफीक अबू शादक, अहमद अल मासरी, 16 साल की रीमास अबू शालौफ, 12 साल की समा अबू खुस्वान, मिराल अल-बाब्ली, 5 साल के आदम अल-फवजा और मोहम्मद अल-मादी अल-शरीफ जैसे कई बच्चे शामिल हैं।

चिकित्सा संकट और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े

गाजा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है, जिसकी पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी की है। WHO के साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, गाजा में लगभग 42,000 लोग ऐसे हैं जिन्हें गंभीर और जीवन बदलने वाली चोटें लगी हैं और इनमें से लगभग एक चौथाई बच्चे हैं। इस क्रूर संघर्ष के कारण 5,000 से अधिक लोगों को अपने अंग कटवाने पड़े हैं। सितंबर 2024 से मई 2026 के बीच लगभग 2,300 एम्प्यूटी लोगों की जांच की गई, लेकिन उनमें से केवल 500 लोगों को ही पक्के कृत्रिम अंग यानी प्रोस्थेसिस मिल पाए हैं। इस भारी कमी की मुख्य वजह मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले विशेष लोगों की भारी कमी है, क्योंकि पूरे क्षेत्र में केवल आठ प्रोस्थेटिस्ट ही इन मरीजों की सेवा के लिए मौजूद हैं।

पानी के अंदर मिलता है एक अलग तरह का सुकून

अल जज़ीरा के पत्रकार पेरी विल्टन ने 23 अगस्त 2026 को इस कार्यक्रम की रिपोर्टिंग करते हुए बताया था कि इन बच्चों के लिए पानी किसी वरदान से कम नहीं है। पानी के अंदर इन्हें शारीरिक राहत और बेहतर संतुलन मिलता है, साथ ही वह आज़ादी महसूस होती है जो ज़मीन पर चल पाना इनके लिए मुमकिन नहीं हो पाता। संगठन Heal Palestine का यह मानना है कि केवल दवाइयां देना ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहारे और शारीरिक विकास के लिए इस तरह की गतिविधियां बेहद जरूरी हैं ताकि वे समाज की मुख्यधारा से फिर से जुड़ सकें।

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