गाज़ा में चल रहे युद्ध ने मासूम बच्चों की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। यहाँ के करीब 11 लाख बच्चों को अब मानसिक स्वास्थ्य सहायता की सख्त ज़रूरत है। हालात इतने खराब हैं कि कई बच्चे तो बोलना तक भूल गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इस गंभीर संकट की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का क्या हाल है?

UNICEF और UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक, गाज़ा के 10 लाख से ज़्यादा बच्चों को मानसिक सहयोग चाहिए। युद्ध के तनाव की वजह से बच्चों में डर और चिंता बहुत बढ़ गई है। UNFPA की रिपोर्ट बताती है कि 96% बच्चों को यह महसूस होता है कि उनकी मौत करीब है।

युवाओं की स्थिति भी बहुत चिंताजनक है। इनमें से 61% लोग PTSD, 38% डिप्रेशन और 41% एंग्जायटी का सामना कर रहे हैं। वहीं, वयस्कों में हर पांच में से एक व्यक्ति रोज़ाना आत्महत्या के बारे में सोच रहा है।

युद्ध का बच्चों के व्यवहार पर क्या असर पड़ा?

युद्ध के डर और तनाव की वजह से छोटे बच्चों में बोलने की समस्या देखी जा रही है। कई बच्चे हकलाने लगे हैं और कुछ ने तो बोलना ही बंद कर दिया है। स्पीच थेरेपिस्ट अमीना अल-दहदूह के मुताबिक, विस्थापन शिविरों में रहने वाले 10 में से 6 बच्चों को बोलने में दिक्कत आ रही है।

Save the Children की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में नींद न आना, बिस्तर गीला करना और अचानक गुस्सा आने जैसी समस्याएँ बढ़ गई हैं। साथ ही, Danish Refugee Council की रिपोर्ट कहती है कि विस्फोटक हथियारों के हमलों से कई लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए हैं।

गाज़ा संकट से जुड़े मुख्य आंकड़े

विवरण आंकड़ा/स्थिति
मानसिक सहायता की ज़रूरत वाले बच्चे 11 लाख से ज़्यादा
मौत का डर महसूस करने वाले बच्चे 96%
PTSD से पीड़ित युवा 61%
डिप्रेशन से जूझ रहे युवा 38%
एंग्जायटी (चिंता) वाले युवा 41%
आत्महत्या के विचार रखने वाले वयस्क हर 5 में से 1
बोलने में समस्या वाले बच्चे (शिविरों में) 60%