ग़ज़ा में ईंधन की भारी कमी ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। अब यहाँ के डिलीवरी वर्कर्स को अपनी मोटरसाइकिल छोड़कर साइकिल का सहारा लेना पड़ रहा है। टूटी हुई सड़कों और सेना की मौजूदगी के बीच सामान पहुँचाना अब इन मज़दूरों के लिए बहुत थका देने वाला और जोखिम भरा काम बन गया है।
ग़ज़ा में डिलीवरी वर्कर्स की मुश्किलों का क्या हाल है?
Al Jazeera English की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की कमी की वजह से डिलीवरी करने वाले लोग अब साइकिल चला रहे हैं। 5 मई 2026 तक की जानकारी के अनुसार, ग़ज़ा में ईंधन की कीमतें युद्ध से पहले के मुकाबले करीब पाँच गुना बढ़ गई हैं। वर्कर्स का कहना है कि लंबी दूरी तय करना और टूटी सड़कों पर चलना शारीरिक रूप से बहुत थकाऊ है। साथ ही, उन्हें इज़राइली सेना की चौकियों के पास से गुज़रना पड़ता है, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है।
यूएन (UN) ने ईंधन की कमी को लेकर क्या चेतावनी दी है?
संयुक्त राष्ट्र (UN) की विभिन्न संस्थाओं ने इस संकट पर गहरी चिंता जताई है। 4 मई 2026 को यूएन अधिकारियों ने बताया कि ईंधन की कमी से अस्पतालों, पानी और सफाई व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। OCHA की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरेटर, इंजन ऑयल और गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स पर पाबंदी की वजह से कई ज़रूरी सिस्टम फेल हो गए हैं।
- गंदगी का संकट: लगभग 40,000 क्यूबिक मीटर बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी रोज़ाना रिहायशी इलाकों में बह रहा है क्योंकि पंपिंग स्टेशन बंद पड़े हैं।
- मानवीय मदद: UNHCR ने कहा कि ट्रांसपोर्ट और ईंधन के बढ़ते दामों से राहत सामग्री पहुँचाने में बहुत दिक्कत आ रही है।
- अस्पताल और स्कूल: OHCHR ने बताया कि ईंधन की कमी से स्कूल बसों और ज़रूरी मशीनरी का काम रुक गया है, जिसका असर सीधे तौर पर आम लोगों पर पड़ रहा है।
UNOPS ने एक ईंधन स्टेशन की पहचान की थी, लेकिन इज़राइली अधिकारियों से इसकी मंज़ूरी पिछले एक महीने से लंबित है, जिसकी वजह से ईंधन का भंडारण और वितरण नहीं हो पा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग़ज़ा में ईंधन की कीमतें कितनी बढ़ गई हैं?
5 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ग़ज़ा में ईंधन की कीमतें युद्ध से पहले के मुकाबले लगभग पाँच गुना तक बढ़ गई हैं।
ईंधन की कमी का स्वास्थ्य और सफाई पर क्या असर पड़ा है?
ईंधन न होने से सीवेज पंपिंग स्टेशन बंद हो गए हैं, जिससे रोज़ाना 40,000 क्यूबिक मीटर गंदा पानी रिहायशी इलाकों में बह रहा है और अस्पतालों की व्यवस्था भी खतरे में है।