गाजा पट्टी में युद्ध के बीच इस साल की ईद-अल-अधा बेहद गमगीन माहौल में मनाई गई। 27 मई 2026 को गाजा के लोगों ने मलबे में तब्दील हो चुकी मस्जिदों और तबाह हुए घरों के बीच ईद की नमाज़ अदा की। जंग की वजह से इस बार न तो कुर्बानी के लिए मवेशी उपलब्ध थे और न ही लोगों के चेहरे पर खुशी थी। लोग सिर्फ अपनों को खोने के गम और मलबे के ढेर के बीच खड़े होकर दुआ करते नजर आए।

मस्जिदों के मलबे और तंबूओं के बीच पढ़ी गई नमाज़

गाजा पट्टी के अलग-अलग इलाकों जैसे गाजा सिटी, नुसीरात कैंप, मवासी, खान यूनिस और देर अल-बला में लोगों ने तबाह हो चुके बुनियादी ढांचे के बीच नमाज़ पढ़ी। कृषि मंत्रालय ने बताया कि दो मिलियन यानी 20 लाख से अधिक फिलिस्तीनी इस बार ईद पर कुर्बानी नहीं दे पाए क्योंकि पशुधन क्षेत्र पूरी तरह बर्बाद हो चुका है और सीमाएं बंद हैं। इसके साथ ही राफा बॉर्डर बंद होने से लगातार तीसरे साल गाजा के लोग हज यात्रा पर भी नहीं जा सके।

हेब्रोन में पाबंदियों के बीच 30 फीसदी ही रही उपस्थिति

वेस्ट बैंक के हेब्रोन में इब्राहिमी मस्जिद में नमाज़ पढ़ने पहुंचे लोगों पर इजरायली सेना ने सख्त पाबंदियां लगाईं। हेब्रोन के गवर्नर खालिद दुदीन ने बताया कि इजरायली पाबंदियों और सुरक्षा जांच के कारण मस्जिद में उपस्थिति सामान्य दिनों के मुकाबले सिर्फ 30 फीसदी रह गई। इजरायली सैनिकों ने गेट बंद कर दिए, नमाजियों की तलाशी ली और वहां दहशत का माहौल पैदा किया। बेथलहम के मुफ्ती शेख अब्दुल माजिद अमरना ने कहा कि इस साल ईद का संदेश यही है कि तमाम कोशिशों के बावजूद इस कौम को मिटाया नहीं जा सकता।

ईद की पूर्व संध्या पर इजरायली हमला और लोगों का दर्द

ईद से ठीक एक दिन पहले 26 मई को इजरायली हवाई हमलों में हमास के सैन्य विंग के नए नेता मोहम्मद ओदेह की मौत की खबर आई। विस्थापित हो चुके गाजा के लोगों ने अपना दुख साझा करते हुए कहा कि उनके लिए कोई ईद नहीं है। आयदा अल-बन्ना नामक महिला ने बताया कि उनके बच्चे मारे जा चुके हैं और ईद सिर्फ उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनों को नहीं खोया है। वहीं महमूद सकर नामक व्यक्ति ने कहा कि यह कोई ईद नहीं है, हम सब अंदर से मर चुके हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

गाजा में इस साल ईद-अल-अधा की नमाज़ कहाँ पढ़ी गई?

गाजा के लोगों ने जंग में मलबे में तब्दील हो चुकी मस्जिदों, तबाह हुए घरों और अस्थायी तंबूओं के बीच ईद-अल-अधा की नमाज़ पढ़ी।

गाजा के लोग इस साल कुर्बानी क्यों नहीं दे पाए?

कृषि मंत्रालय के अनुसार, जारी घेराबंदी और युद्ध से पशुधन क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो गया है, जिससे 20 लाख से अधिक लोग कुर्बानी देने से वंचित रह गए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.