गाजा के मछुआरों के लिए जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है। इसराइल के साथ चल रही जंग की वजह से उनका पूरा कारोबार खत्म हो चुका है। अब वे बहुत कम साधनों के साथ अपनी रोजी-रोटी वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट में बताया गया है कि मछुआरे टूटे हुए सामानों को ठीक कर फिर से समंदर में उतरना चाहते हैं।
मछली पकड़ने के कारोबार में कितना नुकसान हुआ है?
फिलिस्तीन फिशर्मन सिंडिकेट के मुताबिक मछुआरों को करीब 75 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। गाजा की 95 प्रतिशत नावें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं और 300 से ज्यादा नावों को मरम्मत की जरूरत है। इसराइल की पाबंदियों की वजह से जरूरी सामान लाना मुश्किल है, जिससे काम दोबारा शुरू करने में दिक्कत आ रही है। गाजा ह्यूमन राइट्स सेंटर ने बताया कि तटरेखा को मिलिट्री ज़ोन बना दिया गया है जिससे मछुआरों पर हमले बढ़ गए हैं।
इसराइल की पाबंदियां और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का क्या कहना है?
पहले मछुआरे 20 समुद्री मील तक जा सकते थे, लेकिन अब इस सीमा को घटाकर 3 या 6 मील कर दिया गया है। कई बार तो समंदर को पूरी तरह बंद रखा गया। FAO ने कहा है कि वे नावों और पैसों से मदद करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए युद्ध विराम और सुरक्षित रास्ता मिलना जरूरी है। जानकारों का मानना है कि मछली उद्योग को खत्म करना फिलिस्तीनियों को दूसरों पर निर्भर बनाने की एक रणनीति है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल आर्थिक नुकसान | 75 मिलियन डॉलर |
| नावों की स्थिति | 95 प्रतिशत खराब |
| मछली पकड़ने का क्षेत्र | 20 मील से घटकर 3-6 मील |
| मछली पकड़ में गिरावट | 2022 के मुकाबले सिर्फ 7.3 प्रतिशत |
| तटरेखा की स्थिति | क्लोज्ड मिलिट्री ज़ोन |
| उपकरणों की स्थिति | ड्यूल-यूज़ श्रेणी में प्रतिबंधित |
| रिपोर्ट की तारीख | 18 अप्रैल 2026 |
