GCC देशों ने खेती-बाड़ी के तरीके बदलने के लिए एक नया क्षेत्रीय प्लान बनाया है। मस्कट में 8 जून 2026 को एक खास वर्कशॉप शुरू हुई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक को खेतों में उतारने पर चर्चा हुई। इस कदम का मुख्य मकसद पानी की कमी जैसी समस्याओं को दूर करना और खाने-पीने की चीजों के लिए दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता को कम करना है।
AI और डिजिटल तकनीक से खेती में क्या सुधार होगा?
इस नए प्रोजेक्ट के तहत AI और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इससे फसलों की क्वालिटी बढ़ेगी और पैदावार में सुधार होगा। इसके साथ ही, कम पानी में ज़्यादा फसल उगाने और प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा। GCC देशों के लिए यह एक बड़ी प्राथमिकता है क्योंकि वहां खेती के लिए जमीन कम है और तापमान बहुत ज्यादा रहता है।
इस नई पहल में कौन से संगठन शामिल हैं?
इस प्रोजेक्ट को GCC देशों और ICARDA (International Center for Agricultural Research in the Dry Areas) ने मिलकर शुरू किया है। मस्कट में 8 से 10 जून 2026 तक चली इस वर्कशॉप में GCC सचिवालय के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। ओमान के कृषि, मत्स्य पालन और जल संसाधन मंत्रालय ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की और इसे आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई। यह प्रोग्राम किसी एक देश का नहीं बल्कि पूरे GCC क्षेत्र का एक साझा प्रयास है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
GCC और ICARDA का नया प्रोजेक्ट क्या है?
यह एक संयुक्त पहल है जिसका मकसद AI और डिजिटल तकनीक के जरिए खेती को आधुनिक बनाना है ताकि पानी की कमी और खाद की समस्याओं को हल किया जा सके।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कब और कहां हुई?
इस पहल की औपचारिक शुरुआत 8 जून 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में एक तीन दिवसीय वर्कशॉप के जरिए हुई।
