खाड़ी देशों (GCC) में निवेश का कारोबार तेज़ी से बढ़ा है। Boston Consulting Group (BCG) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में यहाँ एसेट मैनेजमेंट का कुल आंकड़ा 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 10% की बढ़ोतरी है और पिछले एक दशक की सबसे मज़बूत परफॉरमेंस मानी जा रही है।

BCG की ‘Global Asset Management Report 2026’ में बताया गया है कि पूरी दुनिया में एसेट मैनेजमेंट का कुल आंकड़ा 147 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जिसमें 11% की सालाना बढ़त देखी गई है। GCC देशों में इस बढ़त के पीछे रिटेल और संस्थागत निवेशकों का बड़ा हाथ रहा है।

विवरण आंकड़े/जानकारी
GCC कुल एसेट (AuM) 2.7 ट्रिलियन डॉलर
सालाना बढ़त (GCC) 10%
रिटेल एसेट ग्रोथ 14%
संस्थागत एसेट ग्रोथ 9%
संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 93%
रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी 7%
वैश्विक एसेट (Global AuM) 147 ट्रिलियन डॉलर

सऊदी अरब इस ग्रोथ में सबसे मुख्य भूमिका निभा रहा है। पूरे मिडिल ईस्ट और GCC देशों में रिटेल म्यूचुअल फंड और ETF का सबसे बड़ा हिस्सा सऊदी अरब के पास है। इसके बाद UAE और कुवैत का नंबर आता है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की GOSI-PPA इस क्षेत्र की सबसे बड़ी पेंशन फंड है, जबकि कुवैत का WAFRA दूसरे नंबर पर है।

सॉवरेन वेल्थ फंड्स की बात करें तो कुवैत इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी के पास सबसे ज़्यादा बाहरी तौर पर मैनेज किए गए एसेट हैं और उसके बाद अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी का स्थान है। BCG के मैनेजिंग डायरेक्टर लुकाज़ रे ने कहा कि GCC एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ मुकाबले के लिए नए तरीकों की ज़रूरत है।

रिपोर्ट में नई तकनीक के असर के बारे में भी बताया गया है। अनुमान है कि AI के इस्तेमाल से एसेट मैनेजरों का कामकाज का खर्च 25% से 35% तक कम हो सकता है। साथ ही, टोकनाइज़्ड एसेट्स की कीमत 2030 तक 14 ट्रिलियन डॉलर और 2035 तक 55 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।