पश्चिम एशिया में ईरान के साथ चल रहे तनाव का असर अब खाड़ी देशों के बैंकिंग सिस्टम पर दिखने लगा है। Fitch Ratings की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह विवाद लंबा चलता है, तो GCC देशों के बैंक अब पब्लिक मार्केट के बजाय प्राइवेट लोन और सिंडिकेटेड लोन की तरफ रुख करेंगे। मार्केट में बढ़ती अस्थिरता की वजह से अब बैंकों को अपना फंड जुटाने का तरीका बदलना पड़ रहा है।

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बैंक अब प्राइवेट लोन की तरफ क्यों बढ़ रहे हैं?

Fitch Ratings के अनुसार, ईरान विवाद के चलते पब्लिक डेट मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव है। इस वजह से बैंकों के लिए खुले बाजार से पैसा जुटाना जोखिम भरा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही आने वाले समय में हालात ठीक हो जाएं, लेकिन 2026 में कर्ज जुटाने की संख्या 2025 के रिकॉर्ड स्तर से कम रहेगी। इस बीच, Deutsche Bank के अधिकारी Abdeslam Alaoui ने कहा कि बैंक तभी वापस पब्लिक मार्केट में आएंगे जब माहौल पूरी तरह स्थिर होगा और युद्ध के प्रभाव कम होंगे।

बैंकों की मदद के लिए क्या कदम उठाए गए?

क्षेत्र के सेंट्रल बैंकों ने बैंकिंग सिस्टम को बचाने के लिए कई उपाय किए हैं। कतर के सेंट्रल बैंक ने बैंकों को यह छूट दी है कि वे प्रभावित ग्राहकों के लोन की किस्तों और ब्याज के भुगतान में देरी कर सकें। इसके अलावा, डिपॉजिट के लिए रिजर्व रखने के नियमों में भी ढील दी गई है। UAE के Emirates NBD ने मई 2026 में AT1 बॉन्ड सेल किया, जबकि सऊदी अरब के Al Rajhi Bank ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए 750 मिलियन डॉलर जुटाए।

बैंकों द्वारा जुटाए गए फंड और वित्तीय स्थिति की जानकारी नीचे दी गई टेबल में है:

विवरण डेटा / जानकारी
कुल डॉलर कर्ज (2026 के पहले 4 महीने) 17.5 बिलियन डॉलर
प्राइवेट प्लेसमेंट (अब तक) 4.3 बिलियन डॉलर से ज्यादा
सिंडिकेटेड लोन (अब तक) 2.3 बिलियन डॉलर
Al Rajhi Bank द्वारा जुटाया गया फंड 750 मिलियन डॉलर
UAE बैंकों की रिफाइनेंसिंग जरूरत 4.4 बिलियन डॉलर
डॉलर कर्ज में सालाना बढ़ोतरी लगभग 20%

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान विवाद का GCC बैंकों पर क्या असर पड़ा है?

विवाद के कारण पब्लिक मार्केट में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे बैंक अब फंड जुटाने के लिए प्राइवेट लोन और सिंडिकेटेड लोन पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं।

कतर के सेंट्रल बैंक ने बैंकों के लिए क्या सुविधा दी है?

कतर सेंट्रल बैंक ने प्रभावित ग्राहकों के लोन पेमेंट में देरी की अनुमति दी है और बैंकों के लिए रिजर्व डिपॉजिट की जरूरतों को कम किया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.