खाड़ी देशों पर हो रहे लगातार हमलों के बीच जीसीसी चीफ जसीम मोहम्मद अल बुदैवी ने अपनी बात रखी है। उन्होंने 7 अप्रैल 2026 को कहा कि यह मुश्किल वक्त हमारे परिषद की अपनी उपलब्धियों और बुनियादी ढांचे को बचाने की काबिलियत का असली टेस्ट है। पिछले कुछ दिनों में ईरान की ओर से कुवैत और सऊदी अरब के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट्स को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा परिषद में भी चर्चा तेज हो गई है।

हमले में अब तक क्या नुकसान हुआ और वर्तमान स्थिति क्या है?

कुवैत और सऊदी अरब के कई इलाकों में पिछले 24 घंटों से अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों ने हमलों को लेकर जो जानकारी साझा की है वह काफी गंभीर है।

  • कुवैत के डिफेंस सिस्टम ने 9 बैलिस्टिक मिसाइल और 4 बड़े ड्रोन हवा में ही मार गिराए।
  • कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के ठिकानों पर ड्रोन हमले की वजह से कुछ जगहों पर आग लगने की खबर मिली है।
  • सऊदी अरब की सेना ने अपने क्षेत्र में घुस रहे 4 ईरानी ड्रोनों को नष्ट कर दिया है।
  • मिसाइल के टुकड़ों के गिरने से उत्तरी रिहायशी इलाकों में 6 लोग घायल हुए हैं।
  • अभी तक किसी की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन संपत्तियों को नुकसान पहुँचा है।

जीसीसी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जीसीसी के नियमों के मुताबिक किसी एक सदस्य देश पर हमला पूरे खाड़ी क्षेत्र पर हमला माना जाता है। इसी आधार पर सभी देश अब मिलकर सुरक्षा रणनीति बना रहे हैं। यूएन सुरक्षा परिषद ने भी इन हमलों की निंदा की है और खाड़ी देशों को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार दिया है। दूसरी ओर अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने बताया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। खाड़ी देशों के नेता अब समुद्री रास्तों और तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए नए सुरक्षा विजन पर काम कर रहे हैं। आईएमएफ ने भी कहा है कि खाड़ी देश इस युद्ध के झटकों को झेलने में सक्षम हैं।