GCC देशों ने अपनी सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। यह फैसला पूरे क्षेत्र में शांति बनाए रखने और किसी भी संभावित खतरे से मिलकर निपटने के लिए लिया गया है।
GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने साफ किया है कि गल्फ देशों की सुरक्षा अब एक जैसी होगी। इस नियम के मुताबिक, किसी भी एक सदस्य देश के खिलाफ की गई कार्रवाई को पूरे समूह पर हमला माना जाएगा। यह फैसला GCC चार्टर और जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के आधार पर लिया गया है।
सुरक्षा पर बड़ी बैठकें और फैसले
इस सुरक्षा नियम को पहले भी कई बार दोहराया गया है। 1 मार्च 2026 को हुई 50वीं असाधारण बैठक में यह तय किया गया था कि सदस्य देशों की सुरक्षा को अलग नहीं किया जा सकता। इसके बाद 10 और 11 जून 2026 को मनामा में हुई 167वीं बैठक में फिर से यही बात कही गई कि एक पर हमला, सब पर हमला माना जाएगा।
यह कड़ा रुख फरवरी 2026 के अंत में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद अपनाया गया। GCC देशों ने अपनी संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत भी ये देश अपनी रक्षा करने का हक रखते हैं।
इन देशों को मिलेगा सुरक्षा कवच
- सऊदी अरब
- यूएई (UAE)
- कुवैत
- कतर
- ओमान
- बहरीन
इस सुरक्षा समझौते में अमेरिका ने भी अपना समर्थन दिया है। 25 जून 2026 को अमेरिका और GCC के बीच एक बैठक हुई, जिसमें GCC देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। हालांकि, जून की बैठक के बाद किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की खबर नहीं आई और कुवैत व बहरीन जैसे देशों ने संयुक्त राष्ट्र के जरिए राजनयिक रास्ते अपनाए।
