GCC का बड़ा बयान, कोलंबिया द्वारा सीरियाई गोलान हाइट्स पर इस्रायल की संप्रभुता को मान्यता देने का किया कड़ा विरोध.

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने 11 अगस्त 2026 को कोलंबिया के उस फैसले की कड़ी निंदा की जिसमें उसने इस्रायल द्वारा कब्जाए गए सीरियाई गोलान हाइट्स पर इस्रायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। GCC के महासचिव जassim मोहम्मद अल-बुदैवी ने स्पष्ट किया कि कोलंबिया का यह कदम सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों के खिलाफ है, जो गोलान को सीरियाई अरब क्षेत्र के रूप में मान्यता देते हैं। इस फैसले के बाद से पूरे अरब जगत में नाराजगी का माहौल है और सभी देश सीरिया की संप्रभुता के समर्थन में खड़े हो गए हैं। आम लोगों और सीरियाई सरकार के लिए यह फैसला काफी चौंकाने वाला रहा है, क्योंकि दुनिया के ज्यादातर देश गोलान को इस्रायल का हिस्सा नहीं मानते हैं।
कोलंबिया का नया फैसला और इस्रायल की प्रतिक्रिया
कोलंबिया सरकार ने 10 अगस्त 2026 को इस मान्यता की घोषणा की थी। सरकार ने इसके पीछे मध्य पूर्व में लगातार बनी अशांति और इस्रायल की सुरक्षा के लिए गोलान के रणनीतिक महत्व का हवाला दिया था। यह फैसला कोलंबिया के नए राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रीएला के 7 अगस्त 2026 को पदभार संभालने के ठीक बाद आया। इस्रायल के विदेश मंत्री गिदेहोन सा'ार ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच आपसी समझ के बाद उठाया गया कदम है। हालांकि, सीरिया के विदेश मंत्रालय ने कोलंबिया के इस बयान को सिरे से खारिज किया और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1981 के प्रस्ताव 497 का खुला उल्लंघन बताया, जिसमें इस्रायल के कब्जे को पूरी तरह अवैध और रद्द घोषित किया गया था।
अरब देशों और संयुक्त राष्ट्र की कड़ी आपत्ति
कोलंबिया के इस कदम के बाद सऊदी अरब, कतर और अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने भी स्पष्ट किया कि गोलान सीरिया की अपनी जमीन है और कोलंबिया की यह मान्यता पूरी तरह कानूनी रूप से गलत और बेबुनियाद है। संयुक्त राष्ट्र भी गोलान हाइट्स को सीरियाई क्षेत्र ही मानता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 497 (1981) साफ कहता है कि इस्रायल द्वारा वहां अपने कानून लागू करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई कानूनी मान्यता नहीं रखता है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी हमेशा यही माना है कि गोलान सीरिया का ही हिस्सा है। आपको बता दें कि अमेरिका के बाद कोलंबिया दुनिया का केवल दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसने इस्रायल की संप्रभुता को गोलान पर मान्यता दी है। अमेरिका ने साल 2019 में ऐसा किया था। इसके अलावा, इस घोषणा का समय ऐसा था जब कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में एक शक्तिशाली भूकंप आया था, जिससे वहां के लोगों में इस फैसले को लेकर और अधिक आलोचना देखने को मिली।