खाड़ी देशों के संगठन GCC ने ईरान की हालिया आक्रामक गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाया है। GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने 22 जुलाई 2026 को ईरान द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इन हरकतों से समुद्री सुरक्षा और दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने United Nations Security Council और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे ईरान की इन कार्रवाइयों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं।
समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा संकट का खतरा
ईरान द्वारा समुद्री जहाजों को निशाना बनाने से नेविगेशन की आजादी खतरे में है। Albudaiwi ने पहले ही बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में ईरान के हमलों को युद्ध अपराध बताया था। इसके अलावा 1 मार्च 2026 को ओमान के Duqm कमर्शियल पोर्ट पर हुए हमले की भी निंदा की गई। GCC देशों का मानना है कि उनकी सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और वे सभी सदस्य देशों के साथ पूरी तरह खड़े हैं। साथ ही, हूती मिलिशिया द्वारा सऊदी अरब को दी गई धमकियों और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी को भी गंभीर माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव
इस बीच, US Central Command (CENTCOM) ने 22 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से उन्होंने 9 कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया है और एक जहाज को निष्क्रिय किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने ईरान की आर्थिक स्थिति और सैन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का जिक्र किया है। जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर Mousavi ने धमकी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो वे अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों की बिजली काट देंगे। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया ने तेहरान प्रांत में हमलों की खबरों को सिरे से खारिज किया है।
