GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) ने ईरान द्वारा नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। काउंसिल का कहना है कि ईरान जानबूझकर खाड़ी क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खत्म करने की कोशिश कर रहा है। इन हमलों से आम लोगों की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
🚨: Bahrain पर ड्रोन हमला, Gulf देशों ने ईरान के खिलाफ खोला मोर्चा, UN में मामला पहुँचा।
हमलों का सिलसिला और GCC की प्रतिक्रिया
यह पूरा मामला 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, ओमान और कतर समेत सभी छह GCC देशों और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। 1 मार्च को बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़यनी की अध्यक्षता में एक इमरजेंसी मीटिंग हुई, जिसमें इन हमलों से हुई तबाही और रिहायशी इलाकों में हुए नुकसान पर चिंता जताई गई।
GCC सचिव-जनरल जासेम मोहम्मद अलबुदईवी ने कहा कि बहरीन और कुवैत में बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने साफ किया कि ईरान की यह हरकतें क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश हैं। 5 मार्च को यूरोपीय संघ (EU) के विदेश मंत्रियों के साथ भी एक बैठक हुई, जिसमें ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की गई और EU ने GCC के साथ अपनी एकजुटता जताई।
नागरिकों की जान को खतरा
मानवाधिकार संस्थाओं ने भी इस मामले में गंभीर चेतावनी दी है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने रिपोर्ट किया कि ईरान ने GCC देशों के अलावा इराक और जॉर्डन में भी रिहायशी इमारतों, होटलों और एयरपोर्ट्स पर हमले किए। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि बहरीन और सऊदी अरब में आम नागरिकों की मौत हुई है और वे घायल हुए हैं, जिसे युद्ध अपराध (War Crimes) मानकर इसकी जांच होनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कदम
25 जून 2026 को GCC सचिव-जनरल ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए सदस्य देशों और जॉर्डन के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव 2817 पास किया, जिसमें इन हमलों की निंदा की गई और जवाबदेही तय करने की बात कही गई।
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक समझौता (MOU) भी साइन हुआ था। वहीं 26 जून को अमेरिका और GCC ने एक साझा बयान जारी कर अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने यह भी साफ किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होनी चाहिए क्योंकि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी है।
GCC देशों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का पूरा अधिकार रखते हैं। काउंसिल का मानना है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।
