30 जुलाई 2026 को GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने कुवैत और जॉर्डन पर हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। इस हमले के बाद से खाड़ी देशों में चिंता का माहौल है और सभी देश कुवैत और जॉर्डन के साथ खड़े होने की बात कर रहे हैं।
हमले की जानकारी और नुकसान
कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता Saud Al-Atwan ने पुष्टि की है कि उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और काफी संपत्ति का नुकसान हुआ। वहीं, जॉर्डन की सेना ने बताया कि उन्होंने पांच ईरानी मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया, जिससे कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के Al Azraq एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिका का रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को करारा जवाब देने की बात कही है। अमेरिकी सेना CENTCOM ने पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान पर जवाबी हमले किए हैं। इस बीच ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में उनके तीन सैनिक मारे गए हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय नियमों और पड़ोसी देशों के सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया है।
