खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर हुए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। 10 जून 2026 को बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित 167वीं मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान इन हमलों को देश की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन बताया गया है। खाड़ी देशों ने सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और कहा है कि वे अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

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खाड़ी देशों पर कैसे और कहां हुए हमले?

10 जून 2026 की सुबह बहरीन के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ईरानी हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। ठीक उसी समय कुवैत की सेना ने भी अपने हवाई क्षेत्र में आ रहे दुश्मनों के टारगेट को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। इसके अलावा जॉर्डन की सेना ने भी अल-अज़राक इलाके की तरफ आ रही पांच मिसाइलों को मार गिराया। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात स्वीकार की है।

सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर GCC का बड़ा फैसला

जीसीसी काउंसिल ने साफ किया है कि इन हमलों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी सामूहिक और व्यक्तिगत सुरक्षा करने के अधिकार को सही ठहराया है। इससे पहले सऊदी अरब और कुवैत की कैबिनेट ने भी बहरीन और जॉर्डन पर हुए हमलों का कड़ा विरोध किया था और हर संकट में उनके साथ खड़े रहने की बात कही थी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हमला कब हुआ और किन देशों को निशाना बनाया गया?

यह हमला 10 जून 2026 की सुबह हुआ, जिसमें कुवैत, बहरीन और जॉर्डन के हवाई क्षेत्रों को निशाना बनाया गया था।

इन हमलों के पीछे किस संगठन का हाथ बताया जा रहा है?

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है।