खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और सऊदी अरब समेत 16 अरब और इस्लामी देशों ने यरुशलम में सोमालिलैंड द्वारा स्व-घोषित दूतावास खोलने के फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस कदम को पूरी तरह से अवैध और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया गया है। खाड़ी देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है ताकि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनी रहे।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने फैसले पर क्या कहा?
GCC के महासचिव जसिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने साफ कहा कि सोमालिलैंड क्षेत्र द्वारा यरुशलम में कथित दूतावास खोलना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र (UN) के फैसलों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे इस अवैध कदम को रोकने के लिए तुरंत और गंभीर कार्रवाई करें, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
सऊदी अरब और अन्य 15 देशों ने मिलकर उठाया यह कदम
इस मुद्दे पर सऊदी अरब, कतर, मिस्र, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, जिबूती, सोमालिया, फिलिस्तीन, ओमान, सूडान, यमन, लेबनान, मॉरिटानिया और अल्जीरिया के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी किया है। इन 16 देशों ने सोमालिलैंड के इस कदम को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इन देशों ने सोमालिया की संप्रभुता और उसकी अखंडता का पूरा समर्थन किया है और कहा है कि वे किसी भी ऐसे एकतरफा फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे जो सोमालिया की एकता को कमजोर करता हो।
क्या है पूरा विवाद और क्यों हो रहा है विरोध?
सोमालिलैंड खुद को एक स्वतंत्र क्षेत्र मानता है और इजराइल ने उसे मान्यता दी थी। अब सोमालिलैंड ने इजराइल के कब्जे वाले यरुशलम शहर में अपना दूतावास खोला है। चूंकि यरुशलम की कानूनी स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र के कड़े नियम हैं, इसलिए अरब और इस्लामी देश इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ मान रहे हैं। सभी देशों का कहना है कि यरुशलम में इस तरह का कोई भी कदम गैर-कानूनी है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सोमालिलैंड के यरुशलम में दूतावास खोलने का विरोध क्यों हो रहा है?
यह कदम संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है, जो यरुशलम की विवादित स्थिति को नजरअंदाज करता है।
इस फैसले के विरोध में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
सऊदी अरब, कतर, मिस्र, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और फिलिस्तीन सहित कुल 16 अरब और इस्लामी देशों ने मिलकर इस कदम की निंदा की है।