खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में जारी संकट को सुलझाने के लिए होने वाली किसी भी बातचीत या समझौते में उनकी भागीदारी ज़रूरी है। 26 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए यह मांग रखी है। यह कदम तब उठाया गया है जब क्षेत्र में ईरान के साथ तनाव चरम पर है और कई शांति प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है।

खाड़ी देशों की प्रमुख मांगें और सुरक्षा चिंताएं क्या हैं?

GCC देशों ने साफ किया है कि सुरक्षा के मामले में वे किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे और उनकी शर्तों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

  • शांति वार्ता में सभी GCC सदस्य देशों को सीधे तौर पर शामिल किया जाए।
  • क्षेत्र में ऊर्जा यानी एनर्जी की सप्लाई बिना किसी बाधा के चलने की लिखित गारंटी मिले।
  • ईरानी मिसाइल कार्यक्रम और उसके परमाणु अभियान से पैदा होने वाले खतरों को पूरी तरह रोका जाए।
  • ईरान समर्थित समूहों द्वारा क्षेत्र में की जा रही अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर लगाम लगे।
  • किसी भी एक सदस्य देश पर हमले को पूरे खाड़ी परिषद पर हमला माना जाएगा।

हालिया तनाव और अब तक की बड़ी घटनाएं

पिछले कुछ हफ्तों में खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है।

तारीख महत्वपूर्ण घटनाक्रम
25 मार्च 2026 सऊदी अरब की सेना ने 32 ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया।
25 मार्च 2026 बहरीन में हुए हमले में एक विदेशी नागरिक की मौत हुई, जो यूएई की सेना के साथ काम करता था।
15 मार्च 2026 ब्रिटेन और GCC के विदेश मंत्रियों ने ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने के खिलाफ बैठक की।
1 मार्च 2026 बहरीन के विदेश मंत्री की अध्यक्षता में ईरान के मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की गई।

ईरान ने हाल ही में अमेरिका के 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। खाड़ी देश अब संयुक्त राष्ट्र के चार्टर 51 का हवाला देते हुए अपनी रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं। ओमान इस मामले में कूटनीतिक संवाद और बातचीत को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।