ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 बिलियन डॉलर के फंड की खबरों के बीच GCC सचिव जनरल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि काउंसिल को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इस मामले पर किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी चैनल से कोई बात नहीं हुई है।

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GCC सचिव जनरल Jasem Mohamed Albudaiwi ने 25 जून 2026 को कहा कि ईरान के साथ भविष्य में होने वाला कोई भी समझौता खाड़ी देशों की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने वाला होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।

क्या है 300 बिलियन डॉलर का मामला

यह पूरा मामला अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MoU) से जुड़ा है, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। इस समझौते के आर्टिकल 6 में ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 बिलियन डॉलर के फंड का जिक्र है।

इस फंड को लेकर अलग-अलग नेताओं ने अलग-अलग बातें कही हैं, जिन्हें नीचे टेबल में समझा जा सकता है:

व्यक्ति/देश बयान/स्थिति तारीख
J.D. Vance (US VP) कहा कि GCC फंड से मदद मिल सकती है यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम बंद करे 15 जून 2026
Donald Trump (US President) फंड को सीधा भुगतान बताने वाली खबरों को Fake News कहा 18 जून 2026
Saudi Arabia कहा कि फंड की कोई जानकारी नहीं है और पहले ईरान के साथ भरोसा बनाना होगा 18 जून 2026
Qatar 300 बिलियन डॉलर के आंकड़े को केवल एक इच्छा (Aspirational) बताया 24 जून 2026
Marco Rubio (US Sec of State) कहा कि खाड़ी नेताओं से इस फंड पर कोई बात नहीं हुई है 23-25 जून 2026
Jasem Albudaiwi (GCC Sec Gen) साफ किया कि काउंसिल को ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है 25 जून 2026

खाड़ी देशों की चिंताएं

सऊदी अरब और कतर समेत कई GCC देशों के मन में इस भारी भरकम रकम को लेकर डर है। उनका मानना है कि अगर ईरान को इतनी बड़ी रकम मिली, तो वह इसका इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स की मदद करने के लिए कर सकता है।

हाल ही में 25 जून 2026 को अमेरिका और GCC के बीच एक संयुक्त बयान जारी हुआ, जिसमें रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा की बात कही गई। इस बयान में ईरानी प्रॉक्सी हमलों की निंदा की गई। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस संयुक्त बयान को उकसावे वाला बताया है।