सऊदी अरब के वाइस फॉरेन मिनिस्टर वलीद अल-खुरैजी ने 13 मार्च 2026 को GCC और इजिप्ट की जॉइंट मिनिस्टीरियल मीटिंग में हिस्सा लिया। यह मीटिंग वर्चुअल तरीके से आयोजित की गई थी। इस बैठक का मुख्य कारण हाल ही में खाड़ी देशों के तेल और नागरिक ठिकानों पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले हैं। सभी देशों ने मिलकर अपनी सुरक्षा को मजबूत करने और ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने पर चर्चा की है।

मीटिंग में किन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा?

इस महत्वपूर्ण वर्चुअल मीटिंग में सऊदी अरब के अलावा यूएई, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान और इजिप्ट के अधिकारी शामिल हुए। इजिप्ट की तरफ से विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती और GCC के सेक्रेटरी जनरल जसीम अल-बुदैवी ने इसमें भाग लिया। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और गल्फ देशों के साथ इजिप्ट की सामूहिक रक्षा को लेकर बातचीत की गई। इसके अलावा खेती, क्लीन एनर्जी और इंडस्ट्री के क्षेत्र में जॉइंट एक्शन प्लान (2024-2026) को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने गाजा की स्थिति और रमजान के दौरान अल-अक्सा मस्जिद में लगाई गई सुरक्षा पाबंदियों के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की।

सुरक्षा और जॉइंट अरब फोर्स की मांग

फरवरी 2026 के अंत में हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यह बैठक बुलाई गई थी। मीटिंग के दौरान इजिप्ट ने मांग रखी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक जॉइंट अरब फोर्स बनाई जाए। सभी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यूएन चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत सभी देशों को अपनी रक्षा करने का पूरा कानूनी अधिकार है। उन्होंने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के रेजोल्यूशन 2817 का भी समर्थन किया, जिसमें बुनियादी ढांचों पर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई है। नेताओं ने माना कि GCC और इजिप्ट की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी है और किसी एक पर हमला सभी पर खतरा माना जाएगा।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.