सऊदी अरब, UAE समेत सभी खाड़ी देशों (GCC) ने तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई को लेकर सोमवार 16 मार्च 2026 को एक अहम इमरजेंसी मीटिंग की है। यह बैठक अचानक पैदा हुए क्षेत्रीय तनाव और समुद्र में सप्लाई रूट पर मंडराते खतरे के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बुलाई गई। इसका मुख्य उद्देश्य सभी गल्फ देशों में पेट्रोल और डीजल जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई को बिना रुके चालू रखना है।

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मीटिंग में किन बातों पर हुआ अहम फोकस

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की देखरेख में हुई इस बैठक में सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान के पेट्रोलियम और ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। मीटिंग के दौरान मौजूदा हालात पर चर्चा की गई।

  • सप्लाई चेन को बनाए रखना: किसी भी इमरजेंसी स्थिति में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को रुकने नहीं दिया जाएगा।
  • इमरजेंसी प्लान की तैयारी: सभी सदस्य देशों के राष्ट्रीय इमरजेंसी प्लान को पूरी तरह तैयार रखा गया है।
  • डेटा अपडेट: रणनीतिक तौर पर रखे गए रिफाइंड तेल के रिजर्व स्टॉक की जानकारी तुरंत अपडेट करने का निर्देश दिया गया है।

कच्चे तेल की कीमतों और मार्केट पर असर

खाड़ी क्षेत्र में हालिया तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावट के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई है। ऐसे में बाजार को स्थिर करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने पिछले 24 घंटों में 40 करोड़ बैरल इमरजेंसी तेल मार्केट में जारी करने का ऐलान किया है। GCC सचिवालय ने साफ किया है कि एनर्जी सिक्योरिटी इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए सबसे जरूरी है। सभी देश मिलकर काम कर रहे हैं ताकि दुनिया और लोकल मार्केट पर कोई बुरा असर ना पड़े।

गल्फ में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर

खाड़ी देशों में लाखों भारतीय और अन्य प्रवासी रहते हैं, जो अक्सर युद्ध और तनाव की खबरों से परेशान हो जाते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू स्तर पर किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है। पेट्रोल-डीजल और अन्य बुनियादी चीजों की सप्लाई चेन सुरक्षित है। टेक्निकल और इमरजेंसी टीम को 24 घंटे अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी तरह की रुकावट के समय तुरंत एक्शन लिया जा सके।