GCC Secretary-General Jassim Al-Budaiwi ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ खाड़ी देशों की रणनीतिक साझेदारी को बहुत ज़रूरी बताया है। उन्होंने साफ किया कि यह रिश्ता सिर्फ व्यापार के लिए नहीं, बल्कि इलाके की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है। हाल ही में उन्होंने ईरान के बढ़ते खतरे और आपसी सहयोग को लेकर कई अहम बातें कहीं हैं।

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ईरान के मुद्दे पर EU से क्या मदद मांगी गई?

GCC Secretary-General ने यूरोपीय संघ से अपील की कि वे ईरान के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने में ज़्यादा प्रभावी राजनयिक भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि GCC देश किसी भी ऐसे निष्पक्ष और न्यायपूर्ण प्रयास का समर्थन करेंगे जिससे दुनिया और इलाके में शांति बनी रहे। उन्होंने यह भी बताया कि खाड़ी देशों की सुरक्षा पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए एक मुख्य आधार है।

व्यापार और विकास के लिए क्या प्लान है?

GCC और EU के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए काफी कोशिशें हो रही हैं। फरवरी 2026 में Secretary-General ने एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को जल्द पूरा करने की बात कही थी। इसके कुछ मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • व्यापार लक्ष्य: 2024 के 197 अरब डॉलर के व्यापार को बढ़ाकर 300 अरब डॉलर तक ले जाना।
  • सहयोग के क्षेत्र: ऊर्जा निर्यात, क्लीन हाइड्रोजन, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंटीग्रेशन पर साथ काम करना।
  • नया तंत्र: GCC की विधायी संस्थाओं और यूरोपीय संसद के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए एक नया सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया गया।

सुरक्षा और रणनीतिक रिश्तों की अहमियत क्या है?

Secretary-General ने यूरोपीय संसद की समिति को बताया कि ईरान की आक्रामकता क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। उन्होंने EU द्वारा GCC देशों को दिए गए समर्थन की तारीफ की और इस साझेदारी को एक रणनीतिक ज़रूरत बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खाड़ी देश अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर करते हैं। वे किसी एक गुट के साथ नहीं जुड़ते, बल्कि सभी वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध रखते हैं।