खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और जॉर्डन ने ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। इन देशों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए साफ किया है कि वे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। 28 फरवरी 2026 से लगातार हो रहे ये हमले नागरिक बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों को निशाना बना रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की शांति खतरे में है।
📰: Gulf देशों और Jordan का ईरान पर कड़ा प्रहार, अपनी सुरक्षा के लिए लेंगे सख्त कदम।
हमलों का बढ़ता दायरा और सुरक्षा के लिए कड़ा रुख
GCC देशों और जॉर्डन का कहना है कि 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद भी हमलों की रफ्तार कम नहीं हुई है, बल्कि इसमें भारी वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर बिजली संयंत्रों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर हमले किए जा रहे हैं। इन देशों ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का सीधा उल्लंघन बताया है।
आत्मरक्षा का अधिकार और इराक का सहयोग
इन सात देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार को दोहराया है। वे अपनी जनता, व्यापारिक जहाजों और महत्वपूर्ण संसाधनों की रक्षा के लिए अब हर जरूरी कदम उठाएंगे। वहीं, इन देशों ने इराक के प्रधानमंत्री के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें 30 सितंबर 2026 तक सभी हथियारों को सरकारी नियंत्रण में लेने की बात कही गई है। इसके जरिए ईरान समर्थित मिलिशिया और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है। इन देशों ने अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तुरंत हस्तक्षेप करने और ईरान पर इन हमलों को रोकने का दबाव बनाने की मांग की है।
