खाड़ी देशों के नेताओं ने 28 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब के जेद्दा में एक अहम बैठक की. ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बाद यह पहली बार था जब सभी सदस्य देश के नेता आमने-सामने मिले. फरवरी से ही इन देशों के तेल ठिकानों और आम बस्तियों पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है.
जेद्दा बैठक का मुख्य मकसद क्या था और वहां क्या चर्चा हुई?
इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य ईरान द्वारा किए गए हजारों मिसाइल और ड्रोन हमलों का ठोस जवाब तैयार करना था. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने इस बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे सभी GCC देश मिलकर अपनी सुरक्षा बढ़ा सकते हैं और इलाके में शांति ला सकते हैं. कतर के अमीर Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani ने कहा कि यह बैठक खाड़ी देशों की एकजुटता को दिखाती है और सुरक्षा के लिए आपसी तालमेल जरूरी है.
ईरान के हमलों पर GCC देशों ने क्या कड़ा रुख अपनाया?
बैठक में शामिल सभी नेताओं ने ईरान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया. नेताओं ने साफ किया कि हर देश को अपनी सुरक्षा और नागरिकों को बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई करने का पूरा हक है. UAE ने जोर देकर कहा कि GCC देशों की सुरक्षा एक है और किसी एक सदस्य देश पर हमला पूरे खाड़ी सिस्टम पर हमला माना जाएगा. वहीं कतर ने आगाह किया कि इस संघर्ष को लंबे समय तक खींचना इलाके के लिए ठीक नहीं होगा.
क्षेत्र में अभी क्या ताज़ा हालात और अपडेट्स हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान की आंतरिक स्थिति खराब है और वह Strait of Hormuz को फिर से खोलना चाहता है. दूसरी तरफ, बहरीन की एक अदालत ने ईरान के साथ मिलकर साजिश रचने वाले 5 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसी बीच, मार्च के बाद पहली बार एक LNG जहाज Strait of Hormuz से गुजरा है, जिससे समुद्री व्यापार में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
GCC नेताओं की बैठक कब और कहां आयोजित हुई?
GCC नेताओं की यह परामर्श बैठक 28 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब के जेद्दा शहर में आयोजित की गई थी.
खाड़ी देशों और ईरान के बीच तनाव कब शुरू हुआ?
इस तनाव की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब ईरान ने सभी छह GCC सदस्य देशों के ऊर्जा और नागरिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे.