GCC देशों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को Geneva में एक इमरजेंसी मीटिंग की। इस बैठक में ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों और उनसे पैदा हुए सुरक्षा खतरों पर चर्चा हुई। कुवैत के राजदूत Nasser Al-Hain ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने और ईरान के खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाने की बात कही ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
GCC देशों ने ईरान द्वारा सऊदी अरब और कतर के टैंकरों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही बहरीन और कुवैत पर हुए हमलों को भी बहुत गंभीर बताया। एक साझा बयान में कहा गया कि किसी भी सदस्य देश पर हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा। GCC ने ईरान को क्षेत्रीय शांति बिगाड़ने और ग्लोबल एनर्जी मार्केट को नुकसान पहुँचाने का जिम्मेदार ठहराया है।
इन देशों ने UN सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह इन हमलों की निंदा करे और Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की सुरक्षा तय करे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से बिना किसी रुकावट या एक्स्ट्रा फीस के जहाजों का रास्ता साफ रहना चाहिए।
यह पूरी मीटिंग ऐसे समय में हुई जब अमेरिका ने भी गुरुवार सुबह ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इससे पहले राष्ट्रपति Donald Trump ने बुधवार को कहा था कि ईरान की हरकतों की वजह से युद्धविराम (ceasefire) खत्म हो गया है। जवाब में ईरान ने कुवैत और कतर जैसे देशों पर मिसाइल दागी और बहरीन में सायरन बजने लगे।
Institute for the Study of War (ISW) और The Critical Threats Project (CTP) के जानकारों का कहना है कि ईरान Strait of Hormuz पर अपना कंट्रोल चाहता है। उनका मानना है कि ईरान युद्धविराम का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत को फिर से बढ़ाने के लिए कर रहा है।
