समुद्री रास्तों को लेकर ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। Gulf Cooperation Council (GCC) के सचिव ने ईरान द्वारा जहाजों को दी जा रही धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब ओमान ने समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कुछ नए कदम उठाए।
क्या है पूरा मामला
24 जून 2026 को ओमान ने International Maritime Organization (IMO) के साथ मिलकर Strait of Hormuz में अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया था। ओमान ने साफ किया था कि इन रास्तों का इस्तेमाल करने के लिए जहाजों से कोई टोल या फीस नहीं ली जाएगी। इसका मकसद उन 11,000 से ज्यादा नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालना था जो वहां फंसे हुए थे। ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र ने बताया कि इन नए रास्तों से ग्लोबल इकोनॉमी को सहारा मिलेगा।
अमेरिका और GCC का कड़ा रुख
25 जून को बहरीन के मनामा में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और GCC के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया कि Strait of Hormuz में जहाजों का आना-जाना बिना किसी शर्त और रोक-टोक के होना चाहिए। अमेरिका और GCC ने साफ तौर पर कहा कि वे किसी भी तरह के टोल या कंट्रोल को स्वीकार नहीं करेंगे। ओमान के विदेश मंत्री Badr Albusaidi ने भी इस बात का समर्थन किया कि भविष्य में किसी भी व्यवस्था के लिए कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी।
जहाज पर हमला और बढ़ता तनाव
तनाव तब और बढ़ गया जब 25 जून को ओमान के Dahit के पास एक कार्गो जहाज पर हमला हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह हमला ईरान के Revolutionary Guards Corps (IRGC) ने किया था। इससे पहले IRGC ने चेतावनी दी थी कि जो जहाज उनके बताए रास्तों का पालन नहीं करेंगे उनके लिए खतरा बढ़ सकता है। इस हमले के बाद IMO ने जहाजों को बाहर निकालने के अपने अभियान को कुछ समय के लिए रोक दिया ताकि सुरक्षा की दोबारा जांच की जा सके।
ईरान का दावा
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और GCC के बयान को उकसाने वाला और गैर-जिम्मेदार बताया है। ईरान का कहना है कि Strait of Hormuz उसके और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि बिना ईरान की भूमिका और उसकी सहमति के वहां सुरक्षित रास्तों की गारंटी नहीं दी जा सकती। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने टोल वसूलने की कोशिश की तो इससे पूरी तरह अफरा-तफरी मच सकती है।
