GCC देशों ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस लगाने के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह फैसला 25 जून 2026 को बहरीन के मनामा में हुई US-GCC मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान लिया गया। सभी सदस्य देशों ने साफ कर दिया है कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी फीस के होना चाहिए।

अमेरिका और GCC का साझा स्टैंड

संयुक्त राज्य अमेरिका और GCC देशों ने एक साझा बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस रास्ते पर जहाजों का मुक्त आवागमन बहुत जरूरी है। यह न केवल क्षेत्र की बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। बैठक में मौजूद मंत्रियों ने किसी भी तरह के टोल, फीस या नियंत्रण के प्रयासों को सिरे से नकार दिया।

ओमान ने की आधिकारिक पुष्टि

इस मामले में ओमान के विदेश मंत्री Badr Albusaidi ने स्पष्ट किया कि भविष्य की किसी भी व्यवस्था में ट्रांजिट फीस लागू नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ओमान अंतरराष्ट्रीय कानून और UN Convention on the Law of the Sea के हिसाब से समुद्री रास्ता सुरक्षित रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।

ईरान की योजना और अमेरिकी विरोध

ईरान लंबे समय से सुरक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण सेवाओं के नाम पर जहाजों से फीस वसूलने की वकालत कर रहा था। अनुमान था कि इससे ईरान को सालाना करीब 40 अरब डॉलर की कमाई हो सकती थी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने उन जहाजों को चेतावनी भी दी थी जो उनके द्वारा तय किए गए रास्तों का पालन नहीं करेंगे।

वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के इस्तेमाल के लिए पैसे वसूलने का अधिकार नहीं है और ऐसा करना खतरनाक साबित होगा। उन्होंने पुष्टि की कि गल्फ देशों में इस तरह की किसी भी फीस का कोई समर्थन नहीं है।

पुरानी विवाद और अस्थायी समझौता

  • मार्च 2026 में GCC महासचिव Jasem Mohamed al-Budaiwi ने ईरान पर सुरक्षित रास्ता देने के बदले फीस लेने का आरोप लगाया था।
  • 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था।
  • इस समझौते के तहत सिर्फ 60 दिनों के लिए बिना किसी शुल्क के कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित निकलने की गारंटी दी गई थी।